MPSC पेपर लीक मामले के बाद पुणे की सड़कों पर हजारों अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया और शीर्ष अधिकारियों के इस्तीफे की मांग की। एनसीपी (एसपी) और कांग्रेस नेताओं ने इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है।

  • MPSC अध्यक्ष और सचिव के तत्काल इस्तीफे की मांग।
  • अभिजीत लेंडवे के कार्यकाल के दौरान हुई सभी परीक्षाओं के फोरेंसिक ऑडिट की मांग।
  • मुंबई क्राइम ब्रांच की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग।
  • एनसीपी (एसपी) और कांग्रेस नेताओं द्वारा आंदोलन को राजनीतिक समर्थन।

पुणे में सोमवार, 7 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और पेपर लीक जैसे घोटालों के खिलाफ एक विशाल विरोध मार्च निकाला। यह मार्च ओमकारेश्वर मंदिर चौक से शुरू होकर पुणे जिला कलेक्ट्रेट तक पहुंचा, जहाँ छात्रों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग MPSC के अध्यक्ष और सचिव का इस्तीफा है। छात्रों का कहना है कि आयोग में अब केवल "बेदाग छवि" वाले अधिकारियों की नियुक्ति होनी चाहिए ताकि भविष्य में परीक्षाओं की पवित्रता बनी रहे और योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय न हो।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि परीक्षा सुरक्षा ढांचे की पूरी तरह से विफलता है। जब अभिजीत लेंडवे जैसे उच्च पदस्थ अधिकारी पेपर लीक में शामिल होते हैं, तो यह लाखों छात्रों के भविष्य और राज्य की प्रशासनिक योग्यता पर सवालिया निशान लगाता है।

इस आंदोलन को तब और मजबूती मिली जब एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार और कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम ने प्रदर्शनकारियों का साथ दिया। रोहित पवार ने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं है, बल्कि अपने हक के लिए लड़ रहे छात्रों का संघर्ष है।

लोक सेवा आयोगों में विश्वास की कमी एक खतरनाक मिसाल कायम करती है, जहाँ उम्मीदवारों को लगता है कि योग्यता से ज्यादा संपर्क मायने रखते हैं।

अभ्यर्थियों ने विशेष रूप से ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-बी) परीक्षा में अनियमितताओं और 2025 की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा तथा कृषि सेवा परीक्षा के मूल्यांकन में त्रुटियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की है कि उन उम्मीदवारों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच की जाए, जिन्हें कथित तौर पर सेटिंग के जरिए चुना गया था।

हालांकि MPSC अध्यक्ष विवेक भिमनवार ने कहा है कि पेपर लीक उनके कार्यभार संभालने से पहले हुआ था, लेकिन मुंबई पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें सातवां रैंक हासिल करने वाली एक महिला उम्मीदवार भी शामिल है। आयोग ने सुरक्षा उपायों के लिए एक आंतरिक समिति बनाई है, लेकिन छात्र इसे नाकाफी मान रहे हैं।

क्या आप जानते हैं?: MPSC महाराष्ट्र के प्रशासन की रीढ़ की हड्डी का निर्माण करता है, इसलिए इसकी प्रक्रिया में कोई भी गड़बड़ी सीधे तौर पर राज्य के शासन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है।

परीक्षा विवाद का विवरण

परीक्षा का नाममुख्य शिकायतमांग
ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-बी)पेपर लीकफोरेंसिक ऑडिट और जांच
राज्य सेवा मुख्य 2025मूल्यांकन में गलतीपुनर्मूल्यांकन और जांच
ग्रुप-सी (क्लर्क)पारदर्शिता का अभाव25 अक्टूबर की परीक्षा निष्पक्ष हो

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: MPSC लीक मामले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
मुख्य आरोपियों में पूर्व उप-सचिव अभिजीत लेंडवे और सहायक अनुभाग अधिकारी विश्वेश्वर दत्तात्रय नाकाते और गोपाल भट्टू मराठे शामिल हैं।

प्रश्न 2: ग्रुप-सी परीक्षा के संबंध में छात्रों की क्या मांग है?
छात्रों की मांग है कि 25 अक्टूबर 2026 को होने वाली प्रारंभिक परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी हो और स्टेनोग्राफर के पदों को पुनर्जीवित किया जाए।