मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने 11 दिनों की भूख हड़ताल के बाद गिरते ब्लड शुगर लेवल के कारण चिकित्सा सहायता स्वीकार की है। यह फैसला सरकार द्वारा मांगों पर विचार करने के आश्वासन के बाद आया है।
- मनोज जरांगे पाटिल ने स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण 11वें दिन IV फ्लूइड लेने पर सहमति जताई।
- ब्लड शुगर लेवल गिरकर 66 mg/dL हो गया और वजन 52 किलो से घटकर 45 किलो रह गया।
- महाराष्ट्र सरकार ने OBC श्रेणी में आरक्षण और कुनबी प्रमाण पत्रों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
- 12 सितंबर को अंतरवाली सारती में एक विशाल जनसभा का आह्वान किया गया है।
महाराष्ट्र सरकार और मराठा आरक्षण कार्यकर्ताओं के बीच जारी गतिरोध मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को एक नाजुक मोड़ पर पहुंच गया। जलना जिले के अंतरवाली सारती गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे मराठा आंदोलन के प्रमुख मनोज जरांगे पाटिल की तबीयत गंभीर होने के बाद उन्होंने अंततः इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड लेने पर सहमति जताई।
वाडीगोदरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. शुभम राठौड़ के अनुसार, श्री जरांगे का ब्लड शुगर लेवल गिरकर 66 mg/dL तक पहुंच गया था। इसके अलावा, उनके वजन में भारी गिरावट देखी गई, जो 52 किलोग्राम से घटकर 45 किलोग्राम रह गया। स्वास्थ्य आपातकाल को रोकने के लिए, उन्हें सुबह 2:30 से 7:00 बजे के बीच IV फ्लूइड की चार बोतलें दी गईं।
यह निर्णय उच्च स्तरीय राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद लिया गया। महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत और विधायक प्रसाद लाड ने फोन पर जरांगे को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार मंगलवार से ही उनकी मांगों पर काम शुरू कर देगी। जरांगे की मुख्य मांग मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के तहत आरक्षण प्रदान करना है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह केवल एक स्वास्थ्य संकट नहीं बल्कि एक उच्च-दांव वाला राजनीतिक दांव है। मराठा पहचान को कुनबी जाति (जो पहले से ही OBC श्रेणी में है) से जोड़कर, जरांगे अलग मराठा आरक्षण के कानूनी अवरोधों को पार करने की कोशिश कर रहे हैं। यह सरकार के लिए एक कठिन चुनौती है, क्योंकि यदि कुनबी प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं, तो मौजूदा OBC समुदायों में अपनी सुविधाओं के कम होने का डर पैदा हो सकता है।
जातिगत पहचान और कानूनी गजट का यह संगम मराठा आरक्षण को आधुनिक भारतीय इतिहास की सबसे जटिल सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों में से एक बनाता है।
ऐतिहासिक रूप से, मराठा आरक्षण का संघर्ष विरोध प्रदर्शनों, अदालती हस्तक्षेपों और सरकारी वादों के चक्रों से गुजरा है। हैदराबाद और सतारा गजट रिकॉर्ड्स को लागू करने की मांग इस बात को साबित करने के लिए केंद्रीय है कि मराठा समुदाय के कई सदस्य 'कुनबी' मूल के हैं, जिससे उन्हें OBC सूची में शामिल करना कानूनी रूप से उचित हो जाएगा।
चिकित्सा सहायता के बावजूद, आंदोलन थमने के संकेत नहीं दे रहा है। जरांगे ने पुणे, ठाणे, नासिक और मुंबई सहित प्रमुख जिलों के मराठों से 12 सितंबर को अंतरवाली सारती में भारी संख्या में एकत्र होने का आह्वान किया है, जिससे संकेत मिलता है कि यह चिकित्सा उपचार केवल एक रणनीतिक ठहराव है, समर्पण नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: मनोज जरांगे पाटिल की मुख्य मांगें क्या हैं?
वे मराठा समुदाय के लिए OBC श्रेणी के तहत आरक्षण की मांग कर रहे हैं, जिसमें ऐतिहासिक गजट रिकॉर्ड के आधार पर कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करना शामिल है।
प्रश्न 2: कुनबी प्रमाण पत्र क्यों महत्वपूर्ण है?
चूंकि कुनबी समुदाय पहले से ही OBC के रूप में वर्गीकृत है, इसलिए यह प्रमाण पत्र प्राप्त करने से मराठों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ कानूनी रूप से मिल सकेगा।