बॉम्बे हाई कोर्ट ने मेडिकल स्टाफ पर हमले के मामले में नौ आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर पालघर पुलिस के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई और इस कार्रवाई को 'अस्वीकार्य' बताया।
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने 9 फरार आरोपियों की गिरफ्तारी में ढिलाई बरतने पर पालघर पुलिस को फटकारा।
- मामला शिव सेना कार्यकर्ताओं द्वारा इलाज के खर्च को लेकर रिलीफ हॉस्पिटल के स्टाफ पर हमले का है।
- अदालत ने ठाणे के डोंबिवली में हुए पिछले हमले का हवाला देते हुए पुलिस की विफलता को रेखांकित किया।
- कोर्ट ने सुझाव दिया कि यदि स्थानीय पुलिस असमर्थ है, तो केस मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच को सौंपा जाए।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को जिले के एक निजी अस्पताल में तोड़फोड़ और मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट के मामले में शिव सेना कार्यकर्ताओं के खिलाफ जांच में ढिलाई बरतने पर पालघर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस ए एस गडकरी और जस्टिस कमल खाता की खंडपीठ ने इस मामले की स्वतः संज्ञान (suo-motu) सुनवाई की और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान, पालघर के पुलिस अधीक्षक यतिश देशमुख ने अदालत को सूचित किया कि एफआईआर में नामजद 10 आरोपियों में से शिव सेना के शहर प्रमुख राहुल घरत को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि शेष नौ आरोपी फरार हैं। इस पर कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पूछा, "त्वरित गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? पुलिस की लापरवाही के कारण ही आरोपी फरार हैं।"
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह मामला स्वास्थ्य क्षेत्र में राजनीतिक दबाव और धमकी के चिंताजनक रुझान को दर्शाता है। जब पुलिस राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहती है, तो इससे एक ऐसा माहौल बनता है जहाँ स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। कोर्ट का यह सख्त रुख चिकित्सा पेशेवरों को राजनीतिक हिंसा से बचाने की एक न्यायिक कोशिश है।
अदालत ने उल्लेख किया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। कोर्ट ने जुलाई में ठाणे जिले के डोंबिवली क्षेत्र के एक सरकारी अस्पताल में डॉक्टर के साथ हुई मारपीट की घटना का जिक्र किया। उस मामले में शिव सेना पार्षद रमेश म्हात्रे को गिरफ्तार किया गया था। बेंच ने नाराजगी जताते हुए कहा, "क्या पुलिस के लिए ठाणे की घटना सबक लेने के लिए पर्याप्त नहीं थी?"
"जब कानून प्रवर्तन एजेंसियां राजनीतिक प्रभाव के आगे झुकती हैं, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जनता और डॉक्टरों के विश्वास को खत्म कर देता है।"
यह घटना 5 सितंबर की रात को पालघर के रिलीफ हॉस्पिटल में हुई थी। आरोप है कि विधायक राजेंद्र गावित के बेटे और deputy तालुका प्रमुख रोहित गावित सहित अन्य शिव सेना कार्यकर्ताओं ने महंगे इलाज को लेकर अस्पताल के कर्मचारियों के साथ मारपीट की। इस मामले की जानकारी ठाणे घटना की सुनवाई के दौरान कोर्ट को मिली।
अंत में, हाई कोर्ट ने पालघर पुलिस को चेतावनी दी कि यदि वे कार्रवाई करने में असमर्थ हैं, तो इस पूरे मामले को मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: पालघर हमले के मामले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
मुख्य आरोपियों में शिव सेना शहर प्रमुख राहुल घरत (गिरफ्तार), विधायक राजेंद्र गावित के बेटे और डिप्टी तालुका प्रमुख रोहित गावित शामिल हैं।
कोर्ट ने सुझाव दिया कि मामले की जांच मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच को सौंपी जाए।