जैसलमेर जिला प्रशासन ने 'ऑपरेशन क्लीन' के तहत अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित अवैध धार्मिक संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया है। यह कार्रवाई सरकारी भूमि और विस्थापित परिवारों के लिए आरक्षित भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए की गई है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- जैसलमेर प्रशासन ने 'ऑपरेशन क्लीन' के तहत सीमावर्ती गांवों में अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया।
- छह अवैध मस्जिदों और मदरसों को ध्वस्त किया गया जो सरकारी भूमि पर बने थे।
- राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि बताया गया।
- कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल और सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की गई थी।
राजस्थान के जैसलमेर जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन ने एक बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाया है। जिला प्रशासन ने 'ऑपरेशन क्लीन' के तहत भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे इलाकों में छह कथित अवैध मस्जिदों और मदरसों के निर्माण को ध्वस्त कर दिया है। यह कार्रवाई गुरुवार को नचना, तनोट और शाहगढ़ क्षेत्रों में की गई, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध निर्माणों पर सख्त संदेश गया है।
रणनीतिक महत्व और कार्रवाई का क्षेत्र
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान मिर्पुरा, हिंदोलन की ढाणी, अहमदपुरा और धनना जैसे गांवों में चलाया गया। इन संरचनाओं को हटाने के लिए भारी मशीनरी (अर्थमूवर्स) का उपयोग किया गया। सुरक्षा की दृष्टि से यह क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए इस पूरी प्रक्रिया के दौरान राजस्व, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियों का भारी जमावड़ा रहा। यह अभियान अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में संचालित किया गया था।
कानूनी आधार और भूमि का विवाद
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ये संरचनाएं सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनाई गई थीं। विशेष रूप से, इनमें से कुछ निर्माण उस भूमि पर थे जो पोंग बांध परियोजना के कारण विस्थापित हुए परिवारों के पुनर्वास के लिए आरक्षित की गई थी। इस मामले में कानूनी बाधाओं को तब दूर किया गया जब राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ ने 13 जुलाई को एक महत्वपूर्ण आदेश सुनाया। न्यायालय ने सीमावर्ती क्षेत्रों में धार्मिक संस्थानों को जारी किए गए बेदखली और कारण बताओ नोटिसों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें यह टिप्पणी की गई कि 'राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है'।
कानून व्यवस्था की स्थिति
सीमावर्ती क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी थी। हालांकि, प्रशासन ने संतोष व्यक्त किया कि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही। इस अभियान का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी किसी भी संभावित चुनौती को समाप्त करना है।