सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में जारी किए गए पोस्ट‑फ़ैक्टो पर्यावरणीय क्लियरेंस नियम को निरस्त कर दिया, परन्तु केंद्र को भविष्य में ‘अम्नेशी योजना’ लागू करने का अधिकार मान्यता दी। इस फैसले से विकास परियोजनाओं के नियामक ढाँचे में बदलाव की संभावना है।

मुख्य बिंदु

  • SC ने 2021 का पोस्ट‑फ़ैक्टो क्लियरेंस नियम रद्द किया
  • केंद्र को ‘अम्नेशी योजना’ जारी रखने का अधिकार मिला
  • पर्यावरणीय नियमन में भविष्य में अधिक स्पष्टता की उम्मीद

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 2021 में जारी किए गए नियम को खारिज कर दिया, जिसमें सरकार को परियोजनाओं के लिए पोस्ट‑फ़ैक्टो (पश्चात) पर्यावरणीय मंजूरी देने का अधिकार दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि ऐसी मंजूरी केवल विधायी अधिसूचना के माध्यम से ही प्रदान की जा सकती है, न कि न्यायिक आदेशों से।

हालाँकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार को ‘अम्नेशी योजना’ के तहत उन परियोजनाओं को वैध मानने का अधिकार है, जिनमें पहले पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन हुआ हो, बशर्ते वे भविष्य में नियमानुसार कार्य करें। यह निर्णय विकास‑पर्यावरण संतुलन के पुनः मूल्यांकन को दर्शाता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this judgment could reshape how infrastructure projects navigate environmental compliance, pushing states to adopt clearer statutory frameworks while preserving governmental flexibility for remedial schemes.

"The verdict underscores the judiciary’s role in reinforcing statutory processes without stifling policy tools like amnesty schemes," says environmental law expert Dr. Priya Sharma.
क्या आप जानते हैं?: भारत में अब तक 15 बड़े ‘अम्नेशी योजना’ लॉन्च किए जा चुके हैं, जिनमें से 9 ने पर्यावरणीय उल्लंघन को कम करने में मदद की है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या यह फैसला सभी मौजूदा परियोजनाओं पर लागू होगा?

उत्तर: हाँ, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पोस्ट‑फ़ैक्टो क्लियरेंस नियम सभी वर्तमान और भविष्य की परियोजनाओं पर समान रूप से लागू होगा।

प्रश्न 2: ‘अम्नेशी योजना’ के तहत किन शर्तों को पूरा करना होगा?

उत्तर: योजना के तहत परियोजनाओं को भविष्य में सभी पर्यावरणीय प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा, साथ ही पुनर्स्थापनात्मक उपाय भी लागू करने होंगे।