खड़ी फसलों को बचाने के लिए किसानों के भारी दबाव के बाद प्रशासन ने भवानीसागर बांध से लोअर भवानी प्रोजेक्ट (LBP) नहर में पानी की मात्रा बढ़ाकर 2,100 क्यूसेक कर दी है। यह कदम ईरोड, करूर और तिरुप्पुर जिलों के लाखों एकड़ कृषि क्षेत्र के लिए जीवनदान साबित होगा।
- भवानीसागर बांध से LBP नहर में जल निकासी बढ़ाकर 2,100 क्यूसेक की गई।
- ईरोड, करूर और तिरुप्पुर के लगभग 2.07 लाख एकड़ क्षेत्र को सिंचाई लाभ मिलेगा।
- बांध का वर्तमान जल स्तर 105 फीट की कुल क्षमता के मुकाबले केवल 57.25 फीट है।
तमिलनाडु के ईरोड जिले में स्थित भवानीसागर बांध से सोमवार, 17 अगस्त को लोअर भवानी प्रोजेक्ट (LBP) नहर में पानी की मात्रा बढ़ाकर 2,100 क्यूसेक कर दी गई। यह निर्णय स्थानीय किसानों द्वारा किए गए निरंतर प्रदर्शनों और उनकी पुरजोर मांगों के बाद लिया गया है, क्योंकि पानी की कमी के कारण खड़ी फसलें सूखने की कगार पर थीं।
यह बांध क्षेत्र के कृषि पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ है, जो ईरोड, करूर और तिरुप्पुर जिलों में लगभग 2.07 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करता है। इसके अलावा, यह कलिंगरायन, अरक्कनकोट्टई और थाडापल्ली नहर प्रणालियों के तहत आने वाले अयाकट क्षेत्रों को भी पानी उपलब्ध कराता है। हालांकि, इस वर्ष जलाशय में पानी के कम भंडारण के कारण, निर्धारित समय सारिणी के अनुसार पानी नहीं छोड़ा जा सका, जिससे किसानों में भारी रोष था।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह स्थिति दक्षिण भारत में मानसून की अनिश्चितता और जल प्रबंधन की गंभीर चुनौतियों को उजागर करती है। जब बांध का स्तर अपनी कुल क्षमता (32.80 tmc ft) के मुकाबले केवल 6.40 tmc ft रह जाता है, तो कृषि और पशुधन के बीच जल वितरण का संघर्ष बढ़ जाता है। यह केवल सिंचाई का मुद्दा नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिरता का प्रश्न है।
"जल स्तर में भारी गिरावट के बावजूद सीमित पानी का रणनीतिक वितरण ही फसलों को पूरी तरह बर्बाद होने से बचाने का एकमात्र तरीका है।"
किसानों ने पानी की मांग को लेकर तीन बार विरोध प्रदर्शन किए थे, जिसमें न केवल फसलों को बचाने बल्कि अपने मवेशियों के पीने के पानी की व्यवस्था करने की मांग शामिल थी। 15 अगस्त को, प्रशासन ने 1,03,500 एकड़ क्षेत्र में फसलों की 'विशेष वेटिंग' के लिए 15 दिनों तक पानी छोड़ने का निर्णय लिया था। शुरुआत में यह प्रवाह 500 क्यूसेक था, जिसे अब बढ़ाकर 2,100 क्यूसेक किया गया है और इसे 2,300 क्यूसेक तक बनाए रखने की योजना है।
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, सोमवार दोपहर 2 बजे तक बांध का जल स्तर 57.25 फीट था, जबकि इसकी पूर्ण क्षमता 105 फीट है। बांध में पानी का अंतर्वाह (inflow) 1,233 क्यूसेक दर्ज किया गया। सिंचाई के लिए अरक्कनकोट्टई और थाडापल्ली नहरों में 700 क्यूसेक और पेयजल आवश्यकताओं के लिए भवानी नदी में 100 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
| विवरण | वर्तमान स्थिति | कुल क्षमता |
|---|---|---|
| जल स्तर (फीट) | 57.25 | 105 |
| भंडारण (tmc ft) | 6.40 | 32.80 |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: LBP नहर में पानी की मात्रा क्यों बढ़ाई गई?
उत्तर: किसानों के विरोध प्रदर्शनों और खड़ी फसलों को सूखने से बचाने के लिए जल निकासी 2,100 क्यूसेक तक बढ़ाई गई।
प्रश्न 2: वर्तमान में बांध में कितना पानी बचा है?
उत्तर: वर्तमान भंडारण 6.40 tmc ft है, जो कुल क्षमता 32.80 tmc ft का एक छोटा हिस्सा है।