भारतीय और अमेरिकी नौसेनाओं ने कोच्चि में विस्फोटक निपटान (EOD) अभ्यास के आठवें संस्करण को सफलतापूर्वक पूरा किया। इस प्रशिक्षण में IED खतरों और मानवरहित पानी के नीचे प्रणालियों के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया।

  • भारतीय और अमेरिकी नौसेनाओं ने कोच्चि में EOD अभ्यास 2026 संपन्न किया।
  • प्रशिक्षण में IED खतरों, माइन न्यूट्रलाइजेशन और अंडरवाटर ड्रोन्स का उपयोग शामिल था।
  • दोनों देशों के बीच समुद्री इंटरऑपरेबिलिटी और परिचालन तालमेल को मजबूत किया गया।

दक्षिण नौसेना कमान, कोच्चि में 14 अगस्त, 2026 को भारत और अमेरिका की नौसेनाओं के बीच विस्फोटक निपटान (Explosive Ordnance Disposal - EOD) अभ्यास का आठवां संस्करण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह द्विपक्षीय अभ्यास दोनों देशों की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और जटिल समुद्री खतरों से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है।

भारतीय नौसेना द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य परिचालन ज्ञान का आदान-प्रदान और EOD संचालन में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना था। विषय विशेषज्ञों (SME) के बीच हुए गहन विनिमय में तात्कालिक खतरों, जैसे कि इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेस (IEDs), उन्हें सुरक्षित करने की प्रक्रियाओं और समुद्री बारूदी सुरंगों (Mines) को निष्क्रिय करने की तकनीकों पर चर्चा की गई।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, यह अभ्यास केवल एक तकनीकी प्रशिक्षण नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक संदेश है। उन्नत मानवरहित अंडरवाटर सिस्टम (Unmanned Underwater Systems) का एकीकरण यह दर्शाता है कि दोनों नौसेनाएं अब युद्ध के भविष्य की ओर बढ़ रही हैं, जहां मानव जोखिम को कम करने के लिए AI और रोबोटिक्स की भूमिका सर्वोपरि होगी।

क्रॉस-ट्रेनिंग चरण के दौरान, गोताखोरी के विभिन्न विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसमें मलबे का स्थान खोजना (Wreck Location), बचाव कार्य (Salvage), विशेष उपकरणों का उपयोग और स्लिदरिंग ऑपरेशंस शामिल थे। इन गतिविधियों ने दोनों देशों की डाइविंग टीमों की पेशेवर दक्षता और कौशल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

"समुद्री सुरक्षा में इंटरऑपरेबिलिटी का अर्थ केवल एक साथ काम करना नहीं है, बल्कि एक-दूसरे की प्रणालियों और रणनीतियों के साथ पूरी तरह से एकीकृत होना है, जो इस EOD अभ्यास का मुख्य केंद्र था।"

ऐतिहासिक रूप से, भारत और अमेरिका ने अपने रक्षा संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' से आगे बढ़ाकर 'व्यापक वैश्विक साझेदारी' में बदल दिया है। यह अभ्यास उसी दिशा में एक और कदम है, जो यह सुनिश्चित करता है कि दोनों नौसेनाएं किसी भी आपातकालीन स्थिति में एक-दूसरे का प्रभावी ढंग से समर्थन कर सकें।

क्या आप जानते हैं?: विस्फोटक निपटान (EOD) विशेषज्ञ न केवल बम निष्क्रिय करते हैं, बल्कि वे पानी के नीचे के मलबे और खोए हुए सैन्य उपकरणों को खोजने के लिए उन्नत सोनार तकनीक का भी उपयोग करते हैं।
विशेषता पारंपरिक EOD आधुनिक EOD (2026 अभ्यास)
तकनीक मैनुअल डिफ्यूजिंग मानवरहित अंडरवाटर सिस्टम (UUV)
खतरा पहचान दृश्य निरीक्षण सेंसर और AI आधारित पहचान
ऑपरेशन स्थानीय स्तर पर सीमित उच्च इंटरऑपरेबिलिटी और संयुक्त समन्वय

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: EOD अभ्यास का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य IED खतरों, माइन न्यूट्रलाइजेशन और मानवरहित प्रणालियों के उपयोग के माध्यम से परिचालन तालमेल और कौशल बढ़ाना था।

प्रश्न 2: यह अभ्यास कहाँ आयोजित किया गया था?
उत्तर: यह अभ्यास केरल के कोच्चि में स्थित दक्षिणी नौसेना कमान (Southern Naval Command) में आयोजित किया गया था।