केरल के देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन ने मोहनलाल की फिल्म 'अतिमनोहरम' से जुड़े विवाद के बाद सबरीमाला मंदिर में व्यावसायिक फिल्मों की शूटिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब केवल भगवान अयप्पा से संबंधित धार्मिक फिल्मों को ही अनुमति मिल सकेगी।

  • सबरीमाला मंदिर में व्यावसायिक फिल्मों की शूटिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
  • केवल भगवान अयप्पा या धार्मिक विषयों पर आधारित फिल्मों को विशेष अनुमति मिल सकती है।
  • यह फैसला मोहनलाल की फिल्म 'अतिमनोहरम' को मिली शुरुआती अनुमति के बाद उपजे विवाद के कारण लिया गया है।

केरल सरकार ने भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक की पवित्रता बनाए रखने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन ने स्पष्ट किया है कि सबरीमाला मंदिर को नियमित फिल्म शूटिंग लोकेशन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यह बयान दिग्गज अभिनेता मोहनलाल की आगामी फिल्म 'अतिमनोहरम' को लेकर हुए विवाद के बाद आया है।

विवाद तब शुरू हुआ जब त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने कथित तौर पर फिल्म टीम को पंपा से सन्निधानम तक शूटिंग की अनुमति दे दी। हालांकि बोर्ड ने यह शर्त रखी थी कि फिल्म में धार्मिक मान्यताओं का नकारात्मक चित्रण नहीं होगा, लेकिन इस निर्णय ने मंदिर के व्यावसायीकरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम केवल सिनेमा के बारे में नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक प्रचार और धार्मिक पवित्रता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है। 'व्यावसायिक' और 'भक्ति' सामग्री के बीच एक स्पष्ट रेखा खींचकर, केरल सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सबरीमाला जैसे आध्यात्मिक केंद्र को केवल पर्यटन या मनोरंजन का साधन न बनाया जाए।

मामला तब और उलझ गया जब वन विभाग ने शूटिंग के लिए आवश्यक अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिससे देवस्वोम बोर्ड की शुरुआती मंजूरी प्रभावी रूप से रद्द हो गई। राज्य के विभिन्न विभागों के बीच यह विरोधाभास मंदिर परिसर के उपयोग को लेकर एक स्पष्ट नीति की कमी को दर्शाता है।

केरल में सिनेमा और आध्यात्मिकता का मिलन अक्सर कानूनी और सामाजिक तनाव पैदा करता है; यह प्रतिबंध किसी भी संभावित सांप्रदायिक घर्षण को रोकने के लिए एक पूर्व-निवारक कदम है।

थारुण मूर्ति द्वारा निर्देशित और मीरा जैस्मीन अभिनीत फिल्म 'अतिमनोहरम' का एक बड़ा हिस्सा कोच्चि और थोडुपुझा में पहले ही शूट किया जा चुका है। हालांकि, नए सरकारी निर्देश के कारण सबरीमाला की शूटिंग का सपना टूट गया है। फिल्म के 24 दिसंबर को दुनिया भर में रिलीज होने की उम्मीद है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सबरीमाला ऐतिहासिक रूप से विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक और कानूनी संघर्षों का केंद्र रहा है, विशेष रूप से महिलाओं के प्रवेश को लेकर। त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड द्वारा मंदिर का प्रशासन यह सुनिश्चित करता है कि पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन हो, जिससे भारी उपकरणों और बड़ी टीम के साथ फिल्म क्रू की अनुमति देना एक कठिन चुनौती बन जाता है।

क्या आप जानते हैं?: सबरीमाला भारत के उन चुनिंदा मंदिरों में से एक है जहाँ श्रद्धालु मंदिर जाने से पहले 41 दिनों के कठोर व्रत का पालन करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या सबरीमाला में कोई भी फिल्म शूट कर सकता है?
नहीं, व्यावसायिक फिल्मों पर प्रतिबंध है। केवल भगवान अयप्पा या धार्मिक विषयों पर आधारित फिल्मों पर विचार किया जा सकता है।

सबरीमाला मंदिर का प्रबंधन कौन करता है?
मंदिर का प्रबंधन त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड द्वारा किया जाता है।