संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के सदस्यों ने दिल्ली कूच करने से रोके जाने के बाद खनौरी सीमा पर राष्ट्रीय राजमार्ग-52 को अवरुद्ध कर दिया है। यह विरोध प्रदर्शन प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ है, जिससे क्षेत्र में यातायात पूरी तरह ठप हो गया है।

  • SKM (गैर-राजनीतिक) सदस्यों द्वारा पंजाब-हरियाणा सीमा पर NH-52 को ब्लॉक किया गया।
  • किसान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध कर रहे हैं।
  • केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठक की मांग।
  • हरियाणा प्रशासन ने बॉर्डर पर पत्थर के बोल्डर और वाटर कैनन तैनात किए।

राष्ट्रीय राजमार्ग-52, जो पंजाब और हरियाणा को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा है, सोमवार को पूरी तरह ठप हो गया। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के सदस्यों ने खनौरी बॉर्डर पर टेंट लगाकर अपना डेरा जमा लिया है। यह कदम तब उठाया गया जब हरियाणा प्रशासन ने दिल्ली की ओर जा रही उनकी 'किसान बचाओ पदयात्रा' को रोक दिया।

इस पदयात्रा में 51 मुख्य किसानों और लगभग 200 सहायक कर्मचारियों का समूह शामिल था, जिसका लक्ष्य 228 किलोमीटर की दूरी तय कर 29 अगस्त तक जंतर-मंतर पहुँचना था। इस विरोध का मुख्य कारण प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता है, जिसे किसान अपनी आजीविका के लिए खतरा मान रहे हैं। SKM (गैर-राजनीतिक) के संयोजक जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा कि जब उन्हें पैदल चलने तक की अनुमति नहीं दी गई, तो उनके पास उसी स्थान पर बैठने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह नाकेबंदी केवल यातायात की समस्या नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार को दिया गया एक रणनीतिक संकेत है। खनौरी बॉर्डर का चयन जानबूझकर किया गया है क्योंकि यह स्थान पिछले आंदोलनों का गवाह रहा है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान के किसानों का इस आंदोलन में शामिल होना यह दर्शाता है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर असंतोष अब केवल पंजाब तक सीमित नहीं है, बल्कि एक अंतर-राज्यीय आंदोलन का रूप ले रहा है।

NH-52 की रणनीतिक नाकेबंदी इस बात का प्रमाण है कि किसान अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में कृषि सुरक्षा उपायों को गैर-परक्राम्य (non-negotiable) बनाना चाहते हैं।

इस अवरोध के कारण संगरूर, पटियाला और बरनाला से नरवाना, जींद और दिल्ली जाने वाले यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन ने वैकल्पिक मार्गों जैसे संगरूर-सुनाम-लेहरा गागा-मूनक या पटियाला-सामना-कैथल का सुझाव दिया है, लेकिन ये रास्ते काफी लंबे और समय लेने वाले हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यह वर्तमान स्थिति 2024-25 के उस लंबे विरोध की याद दिलाती है, जब यह राजमार्ग 13 फरवरी 2024 से 19 मार्च 2025 तक बंद रहा था। उस समय किसान कानूनी रूप से गारंटीकृत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मांग कर रहे थे। उस आंदोलन का अंत पंजाब पुलिस द्वारा बलपूर्वक हटाने के बाद हुआ था। उस समय ग्रामीण सड़कों को भारी नुकसान हुआ था और टैक्सी किराए में 3,000 रुपये तक की वृद्धि देखी गई थी।

विशेषता 2024-25 आंदोलन 2026 विरोध (वर्तमान)
मुख्य मांग कानूनी MSP गारंटी भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध
अवधि एक वर्ष से अधिक जारी (लक्ष्य: 29 अगस्त)
पैमाना क्षेत्रीय/राज्य स्तर बहु-राज्य (पंजाब, यूपी, राजस्थान)

वर्तमान में, हरियाणा प्रशासन ने सीमा पर पत्थर के बोल्डर, कटीले तार और दंगा नियंत्रण वाहनों की तैनाती की है। किसानों ने संकेत दिया है कि वे 29 अगस्त तक यहीं रहेंगे, जब तक कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ उनकी मुलाकात नहीं हो जाती।

क्या आप जानते हैं?: खनौरी बॉर्डर पंजाब और हरियाणा के बीच सबसे संवेदनशील पारगमन बिंदुओं में से एक है, जो अक्सर दिल्ली की कनेक्टिविटी के कारण कृषि राजनीतिक संघर्षों का केंद्र बन जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: किसान NH-52 को क्यों ब्लॉक कर रहे हैं?
किसान प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध कर रहे हैं और केंद्रीय कृषि मंत्री से मिलने की मांग कर रहे हैं।

प्रश्न 2: यात्रियों के लिए वैकल्पिक मार्ग क्या हैं?
यात्री नाकेबंदी से बचने के लिए संगरूर-सुनाम-लेहरा गागा-मूनक या पटियाला-सामना-कैथल मार्ग का उपयोग कर सकते हैं।