प्रदूषण और कंक्रीट के जंगल से जूझ रहे लुधियाना ने राज्य के पहले शहरी वृक्ष गणना अभियान के तहत 2 लाख पेड़ों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया है। इस पहल का उद्देश्य अवैध कटाई को रोकना और हरित क्षेत्र का विस्तार करना है।
- लुधियाना पंजाब का पहला शहर बना जिसने व्यापक स्तर पर वृक्ष गणना और जियो-टैगिंग की है।
- कुल 2 लाख पेड़ों को मैप किया गया, जिनमें से 700 को 'हेरिटेज ट्री' (विरासत वृक्ष) घोषित किया गया है।
- डेटाबेस में पेड़ों की प्रजाति, स्वास्थ्य स्थिति, अक्षांश (Latitude) और देशांतर (Longitude) जैसे विवरण शामिल हैं।
औद्योगिक शहर लुधियाना, जो लंबे समय से गंभीर वायु प्रदूषण और अत्यधिक शहरीकरण की समस्या से जूझ रहा है, ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। नगर निगम लुधियाना ने शहर के भीतर 2 लाख पेड़ों की मैपिंग और जियो-टैगिंग पूरी कर ली है, जिससे यह पंजाब का ऐसा पहला शहर बन गया है जिसने इस स्तर पर डिजिटल वृक्ष गणना की है।
नगर निगम आयुक्त ओजस्वी अलंकर के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया पंजाब सरकार के वन और वन्यजीव संरक्षण विभाग द्वारा अधिसूचित 'गैर-वन सरकारी और सार्वजनिक भूमि के लिए वृक्ष संरक्षण नीति 2024' के तहत की गई है। इस परियोजना के लिए नवी मुंबई स्थित निजी फर्म M/S Ornet Technologies Limited को नियुक्त किया गया है, जिसे प्रति पेड़ 29 रुपये की दर से भुगतान किया जा रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, लुधियाना जैसे औद्योगिक केंद्रों में जहाँ हर तरफ कंक्रीट की इमारतें हैं, वहाँ पेड़ों का सटीक डिजिटल डेटा होना केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही के लिए भी आवश्यक है। जियो-टैगिंग के माध्यम से अब किसी भी पेड़ की अवैध कटाई को तुरंत पकड़ा जा सकेगा, क्योंकि हर पेड़ की फोटो और सटीक लोकेशन डेटाबेस में दर्ज है।
डिजिटल मैपिंग केवल गिनती नहीं है, बल्कि यह शहरी पारिस्थितिकी तंत्र के प्रबंधन का एक वैज्ञानिक तरीका है जो भविष्य के वृक्षारोपण अभियानों को सटीक दिशा देगा।
प्रथम चरण में 46 वार्डों को कवर किया गया है, जिसमें वार्ड 31 से 73 और 91 से 93 शामिल हैं। इस सर्वेक्षण में पाया गया कि 70% पेड़ स्वदेशी प्रजातियों के हैं, जबकि 30% विदेशी प्रजातियों के हैं। सबसे अधिक संख्या फिकस बेंजामिनिया (पुकार) और अशोक के पेड़ों की दर्ज की गई है।
| श्रेणी | विवरण/संख्या |
|---|---|
| कुल मैप किए गए पेड़ | 2,00,000 |
| स्वस्थ पेड़ (80%+) | 1,65,167 |
| विरासत वृक्ष (Heritage Trees) | 700 |
| स्वदेशी प्रजातियां | 70% |
स्वास्थ्य स्थिति के विश्लेषण में यह सामने आया कि 80% से अधिक पेड़ स्वस्थ हैं, जबकि लगभग 32,876 पेड़ों को यांत्रिक रूप से काटा गया है। आयु के आधार पर, सबसे बड़ा समूह 11 से 20 वर्ष के पेड़ों का है, जबकि 50 वर्ष से अधिक पुराने केवल 993 पेड़ ही बचे हैं, जो शहर के पुराने हरित आवरण के क्षरण को दर्शाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. इस जनगणना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य पेड़ों का एक डिजिटल डेटाबेस बनाना है ताकि अवैध कटाई को रोका जा सके और यह पहचाना जा सके कि किन क्षेत्रों में नए वृक्षारोपण की तत्काल आवश्यकता है।
2. क्या यह सर्वेक्षण पूरे शहर में किया गया है?
नहीं, प्रथम चरण में केवल नगर निगम सीमा के भीतर 46 वार्डों को कवर किया गया है। LIT और GLADA के क्षेत्र इसमें शामिल नहीं हैं।