सुप्रीम कोर्ट द्वारा पैदल चलने के अधिकार को मान्यता दिए जाने के बावजूद, भारतीय महानगरों में फुटपाथों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। जानिए क्यों हमारे शहर वाहनों के लिए बने हैं, इंसानों के लिए नहीं।

  • सुप्रीम कोर्ट ने पैदल चलने वालों के मौलिक अधिकार को दोहराया है।
  • बेंगलुरु जैसे महानगरों में फुटपाथों पर अतिक्रमण और खराब नियोजन बड़ी समस्या है।
  • शहरी नियोजन में पैदल यात्रियों को प्राथमिकता देने की तत्काल आवश्यकता है।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले ने भारत के शहरी नियोजन की बुनियादी खामियों को उजागर कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है कि पैदल चलना केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि नागरिकों का एक मौलिक अधिकार है। हालांकि, इस न्यायिक हस्तक्षेप के बावजूद, भारत के बड़े महानगरों की सड़कों पर वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई देती है।

बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों का उदाहरण लें, तो वहां की सड़कों का हाल देखकर यह समझना मुश्किल है कि शहर किसके लिए बनाए गए हैं—इंसानों के लिए या मशीनों के लिए? फुटपाथों का अस्तित्व या तो नाममात्र का है या फिर वे पूरी तरह से अनुपयोगी हो चुके हैं। सड़कों के किनारे उपलब्ध सीमित जगह पर भी पार्किंग, अनधिकृत विक्रेताओं, उपयोगिता बुनियादी ढांचे और निर्माण कार्यों ने कब्जा कर रखा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शहरी बुनियादी ढांचे में यह असंतुलन न केवल पैदल यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। जब लोग सुरक्षित महसूस नहीं करते, तो वे सार्वजनिक परिवहन और पैदल चलने के बजाय निजी वाहनों का उपयोग करने के लिए मजबूर होते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो जाती है।

शहरी नियोजन में पैदल यात्रियों को प्राथमिकता देना केवल सुविधा की बात नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समानता और सुरक्षा का मामला है।

विशेषज्ञों का तर्क है कि समस्या केवल 'अतिक्रमण' की नहीं है, बल्कि समस्या हमारे नियोजन के दृष्टिकोण में है। हमने कभी भी अपनी सड़कों को पैदल चलने वालों के इर्द-गिर्द डिजाइन ही नहीं किया। अधिकांश शहरी विकास मॉडल 'कार-केंद्रित' रहे हैं, जहाँ पैदल यात्रियों को एक 'बाद में सोचने वाली चीज़' (afterthought) माना जाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में शहरीकरण की तीव्र गति ने बुनियादी ढांचे पर अत्यधिक दबाव डाला है। पिछले कुछ दशकों में, शहरों का विस्तार हुआ है, लेकिन पैदल यात्री सुरक्षा के मानक वैश्विक स्तर के अनुरूप विकसित नहीं हुए। विश्व संसाधन संस्थान (WRI) जैसे संगठन लंबे समय से सुरक्षित और लोगों पर केंद्रित सड़कों की वकालत कर रहे हैं, लेकिन नीतिगत स्तर पर बदलाव की गति अत्यंत धीमी रही है।

Did You Know?: पैदल चलने योग्य शहर न केवल कार्बन उत्सर्जन कम करते हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामुदायिक जुड़ाव को भी बढ़ावा देते हैं।

Frequently Asked Questions

1. क्या पैदल चलना भारत में एक कानूनी अधिकार है?
हाँ, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पैदल चलने वालों के अधिकारों और सुरक्षित फुटपाथों की उपलब्धता पर जोर दिया है।

2. शहरों में फुटपाथों की समस्या का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारणों में खराब शहरी नियोजन, पार्किंग के लिए फुटपाथों का उपयोग और बुनियादी ढांचे का अतिक्रमण शामिल है।