मंत्री अजय सिंह ने घोषणा की है कि राज्य सरकार सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण परियोजनाओं की निगरानी के लिए एक डिजिटल डैशबोर्ड लॉन्च करेगी।
- सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों के लिए एक समर्पित डिजिटल डैशबोर्ड तैयार किया जा रहा है।
- महाराष्ट्र के 'शिरपुर मॉडल' पर आधारित होगा राज्य का नया भूजल पुनर्भरण कार्यक्रम।
- लघु सिंचाई विभाग को वर्ष 2026-27 के बजट में ₹3,333 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
राज्य सरकार जल संकट से निपटने और भूजल स्तर को सुधारने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। लघु सिंचाई, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. अजय धरम सिंह ने हाल ही में कलबुर्गी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जानकारी दी कि सरकार जल्द ही एक डिजिटल डैशबोर्ड लॉन्च करेगी। यह डैशबोर्ड राज्य के सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों में चल रही भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण परियोजनाओं की रीयल-टाइम निगरानी सुनिश्चित करेगा।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता लाना और स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर जल प्रबंधन करना है। मंत्री सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक क्षेत्र की विशिष्ट जरूरतों को देखते हुए स्थानीय विधायकों के साथ परामर्श के बाद ही परियोजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। यह डैशबोर्ड न केवल परियोजनाओं की प्रगति दिखाएगा, बल्कि निर्वाचन क्षेत्र-वार विस्तृत डेटा भी प्रदान करेगा, जिससे प्रशासन और जनता दोनों को स्थिति का सटीक ज्ञान होगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत के कई राज्यों में गिरता भूजल स्तर कृषि और पेयजल सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड के माध्यम से, सरकार संसाधनों के दुरुपयोग को रोक सकती है और उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर सकती है जहाँ जल स्तर सबसे तेजी से गिर रहा है। यह डेटा-संचालित दृष्टिकोण भविष्य में सूखे की स्थिति को प्रबंधित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
डिजिटल निगरानी और शिरपुर मॉडल का संयोजन राज्य की जल सुरक्षा के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए सरकार महाराष्ट्र के प्रसिद्ध शिरपुर मॉडल को अपनाने की योजना बना रही है। इस मॉडल के तहत टैंकों को भरने, लिफ्ट सिंचाई, ब्रिज-कम-बैराज, चेक डैम की श्रृंखला और गोकट्टों के निर्माण जैसे विविध उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इससे न केवल वर्षा जल का संचयन होगा, बल्कि मिट्टी की नमी भी बनी रहेगी।
बजट और उपलब्धियां
वित्तीय दृष्टि से, राज्य सरकार ने इस दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। लघु सिंचाई विभाग को 2026-27 के बजट में ₹3,333 करोड़ का भारी-भरकम आवंटन किया गया है। वर्तमान में, विभाग के अधिकार क्षेत्र में 3,810 टैंक हैं, जिनमें से 925 टैंकों को भरने के प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया जा चुका है।
पिछले दो वर्षों (2024-25 और 2025-26) के आंकड़ों पर नज़र डालें तो, SCP और TSP योजनाओं के माध्यम से हजारों किसानों को बोरवेल और बिजली कनेक्शन प्रदान कर सिंचाई सुविधाएं दी गई हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य ने 687 बैराज, चेक डैम और वेंटेड डैम का निर्माण किया है, जिससे 40,316 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की क्षमता विकसित हुई है।
Frequently Asked Questions
1. यह नया डैशबोर्ड क्या जानकारी प्रदान करेगा?
यह डैशबोर्ड सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण परियोजनाओं की विस्तृत और निर्वाचन क्षेत्र-वार जानकारी प्रदान करेगा।
2. सरकार जल संरक्षण के लिए कौन से मॉडल का उपयोग कर रही है?
राज्य सरकार महाराष्ट्र के सफल 'शिरपुर मॉडल' पर आधारित भूजल पुनर्भरण कार्यक्रम लागू करने की योजना बना रही है।