दिल्ली की वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) ड्राफ्ट में 47 लाख से ज़्यादा नाम हटा दिए गए हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है और अरविंद केजरीवाल ने इसे जनसंख्या घटाने की कोशिश बताया है।
- दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से लगभग 47.75 लाख (33%) मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।
- नाम हटाने का मुख्य कारण 'ASDDO' (अनुपस्थित, मृत, डुप्लिकेट या स्थानांतरित) श्रेणी है।
- मतदान केंद्रों की संख्या 13,033 से बढ़ाकर 14,947 कर दी गई है।
- प्रभावित मतदाता 30 सितंबर तक फॉर्म 6 भरकर अपना दावा पेश कर सकते हैं।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस प्रक्रिया के बाद शहर की मतदाता सूची से करीब 47 लाख नाम गायब हैं, जिसका सीधा अर्थ है कि दिल्ली के हर तीन में से एक वोटर का नाम फिलहाल लिस्ट से बाहर है।
चुनाव आयोग द्वारा 30 जून से 17 अगस्त 2026 तक घर-घर जाकर सर्वे किया गया था। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के अनुसार, कुल 1,45,10,299 पंजीकृत मतदाताओं में से केवल 67.22% के फॉर्म ही डिजिटाइज़ हो पाए। शेष 47 लाख से अधिक लोगों को 'अनुपस्थित, दूसरी जगह चले गए, मृत, डुप्लिकेट और अन्य' (ASDDO) श्रेणी में डालकर ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर कर दिया गया है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, किसी भी महानगर में 33% नामों का एक साथ कटना बेहद असामान्य है। हालांकि आयोग इसे 'फ्लोटिंग पॉपुलेशन' (अस्थायी आबादी) का परिणाम बता रहा है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में नामों का हटना चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है। यह न केवल प्रशासनिक चुनौती है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के नजरिए से भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने एक्स (X) पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से नाम काटे जा रहे हैं, चुनाव आयोग भारत की 140 करोड़ की आबादी को घटाकर 50 करोड़ कर देगा। केजरीवाल का आरोप है कि यह प्रक्रिया बिना किसी ठोस आधार के की जा रही है।
"दिल्ली जैसे शहर में जहां आबादी का पलायन बहुत अधिक है, वहां बिना पर्याप्त नोटिस के लाखों नाम हटाना चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।"
प्रशासनिक स्तर पर, मतदान केंद्रों के प्रबंधन में भी बदलाव किया गया है। एक बूथ पर अधिकतम मतदाताओं की संख्या 1,500 से घटाकर 1,200 कर दी गई है। इस बदलाव के कारण मतदान केंद्रों की कुल संख्या 13,033 से बढ़कर 14,947 हो गई है, ताकि मतदान के दिन भीड़ कम हो और प्रक्रिया सुगम रहे।
निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना उचित प्रक्रिया के नहीं हटाया जाएगा। जिन लोगों के नाम कट गए हैं, वे 30 सितंबर तक फॉर्म 6 और आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना दावा पेश कर सकते हैं। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को जारी की जाएगी। यदि कोई मतदाता ERO के फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो वह जिला मजिस्ट्रेट (DM) और फिर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पास अपील कर सकता है।
| विवरण | SIR से पहले | SIR के बाद (ड्राफ्ट) |
|---|---|---|
| कुल पंजीकृत मतदाता | 1,45,10,299 | 97,53,577 |
| मतदान केंद्रों की संख्या | 13,033 | 14,947 |
| प्रति बूथ अधिकतम वोटर | 1,500 | 1,200 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: अगर मेरा नाम वोटर लिस्ट से कट गया है तो मुझे क्या करना चाहिए?
आपको 30 सितंबर 2026 तक जरूरी दस्तावेजों के साथ फॉर्म 6 भरकर चुनाव कार्यालय में जमा करना होगा।
प्रश्न 2: फाइनल वोटर लिस्ट कब जारी होगी?
दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।