भारत के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र के एक नए विश्व मानचित्र में गंभीर त्रुटियों को चिन्हित किया है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अलग क्षेत्रों के रूप में दिखाया गया है। नई दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि मानचित्रण सिद्धांतों का समर्थन करना क्षेत्रीय सीमाओं की स्वीकृति नहीं है।

  • भारत ने अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अलग क्षेत्रों के रूप में दिखाने वाले UN मानचित्र का विरोध किया है।
  • विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि 'समान-क्षेत्र' मानचित्र प्रस्ताव का समर्थन करना किसी विशिष्ट राजनीतिक सीमा का समर्थन नहीं है।
  • भारत का रुख है कि उसकी संप्रभु सीमाएं गैर-परक्राम्य हैं और उन्हें आधिकारिक मानचित्रों के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए।

भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक नए विश्व मानचित्र पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को भारत और चीन की दावा रेखाओं के बीच अलग-अलग क्षेत्रों के रूप में चित्रित किया गया है। नई दिल्ली अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न अंग मानती है और अक्साई चिन को लद्दाख का हिस्सा मानती है, जिसके कारण यह मामला एक कूटनीतिक विवाद बन गया है।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने इन "विसंगतियों" को संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में ला दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भारत ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा के एक प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था, जिसका उद्देश्य समान-क्षेत्र (Equal-area) मानचित्रों को बढ़ावा देना था। भारत ने स्पष्ट किया है कि इस तकनीकी प्रस्ताव का समर्थन करना किसी भी विशिष्ट राजनीतिक मानचित्र की स्वीकृति नहीं है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना तकनीकी मानचित्रण और भू-राजनीतिक संप्रभुता के बीच के संवेदनशील टकराव को उजागर करती है। संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक निकाय के लिए, एक मानचित्र केवल एक चित्र नहीं होता, बल्कि इसे अक्सर क्षेत्रीय दावों के मौन समर्थन के रूप में देखा जाता है। इन त्रुटियों को तुरंत पकड़कर, भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संकेत दिया है कि मानचित्र प्रक्षेप (Projections) में बदलाव को संप्रभु सीमाओं को बदलने के बहाने के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधिर जायसवाल ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जोर देकर कहा कि 4 सितंबर को अफ्रीकी संघ द्वारा समर्थित प्रस्ताव केवल भू-भागों के आनुपातिक आकार को संरक्षित करने के सिद्धांत पर केंद्रित था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव किसी निजी पार्टी या इकाई के किसी विशेष मानचित्र को प्रमाणित नहीं करता है।

"भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमारा रुख स्पष्ट, सुसंगत और गैर-परक्राम्य है; कोई भी गलत चित्रण अस्वीकार्य है।"

1 जुलाई को जारी इस मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश को नागालैंड के साथ उसकी सीमा के बिना दिखाया गया है, जिससे वह असम और चीन के बीच एक अलग क्षेत्र प्रतीत होता है। इसी तरह, अक्साई चिन को भी लद्दाख से अलग दिखाया गया है। हालांकि मानचित्र में जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) के लिए बिंदीदार रेखा का उपयोग किया गया है, लेकिन पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों का चित्रण नई दिल्ली के लिए अस्वीकार्य है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मानचित्र प्रक्षेप का विवाद

सदियों से, मर्केटर प्रक्षेप (Mercator projection) वैश्विक मानक रहा है, लेकिन यह भूमध्य रेखा से दूर के क्षेत्रों के आकार को बढ़ाकर दिखाता है। इक्वल अर्थ प्रक्षेप (Equal Earth projection) 2018 में इसी समस्या को हल करने के लिए लाया गया था, ताकि अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे महाद्वीपों का सही आकार दिखाया जा सके। भारत ने 'मैप को सही करें' प्रस्ताव का समर्थन भौगोलिक निष्पक्षता के आधार पर किया था, न कि राजनीतिक समझौते के रूप में।

विशेषतामर्केटर प्रक्षेपइक्वल अर्थ प्रक्षेप
मुख्य उपयोगनौवहन/कोणसटीक भूमि क्षेत्र
विकृतिध्रुवों पर अधिकक्षेत्रफल की कम विकृति
राजनीतिक प्रभावयूरो-केंद्रित आकारग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व
क्या आप जानते हैं?: मर्केटर प्रक्षेप में ग्रीनलैंड लगभग अफ्रीका के आकार का दिखता है, जबकि वास्तव में अफ्रीका ग्रीनलैंड से लगभग 14 गुना बड़ा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या UN प्रस्ताव के पक्ष में भारत के मतदान का मतलब नए मानचित्र को स्वीकार करना था?
नहीं। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मतदान केवल समान-क्षेत्र प्रतिनिधित्व के सिद्धांत के लिए था, न कि राजनीतिक सीमाओं के लिए।

प्रश्न 2: भारत UN मानचित्र में अरुणाचल प्रदेश के चित्रण को कैसे देखता है?
भारत इसे एक गंभीर विसंगति और अस्वीकार्य चित्रण मानता है, क्योंकि अरुणाचल प्रदेश भारतीय संघ का अभिन्न अंग है।