नव्या आंध्र शिक्षक संघ ने 12वें वेतन संशोधन आयोग (PRC) के गठन न होने के दावों को खारिज करते हुए सरकार से नए आयुक्त की नियुक्ति और तत्काल अंतरिम राहत देने की मांग की है।
- नव्या आंध्र शिक्षक संघ ने इस दावे का खंडन किया कि 12वां PRC गठित नहीं हुआ था।
- पूर्व आयुक्त के इस्तीफे के बाद तत्काल नए आयुक्त की नियुक्ति की मांग।
- शिक्षकों और कर्मचारियों के वित्तीय तनाव को कम करने के लिए अंतरिम राहत (IR) की तत्काल घोषणा की मांग।
नव्या आंध्र शिक्षक संघ ने आंध्र प्रदेश में 12वें वेतन संशोधन आयोग (PRC) की स्थिति को लेकर चल रहे भ्रम को दूर करने का प्रयास किया है। मंगलवार को संघ ने कर्मचारी और शिक्षक संघों के उन नेताओं के दावों को गलत बताया, जिन्होंने कहा था कि राज्य में 12वां PRC अभी तक गठित नहीं हुआ है, और इसी कारण अंतरिम राहत (IR) की घोषणा में देरी हो रही है।
संघ के राज्य अध्यक्ष के. हरिकृष्णा और महासचिव एम. श्रीनिवास राव ने एक बयान में स्पष्ट किया कि 12 जुलाई, 2023 को जारी जी.ओ. एमएस. नंबर 68 के माध्यम से राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर 12वें वेतन संशोधन आयोग का गठन किया था। इसके तहत पूर्व आईएएस अधिकारी मनमोहन सिंह को वेतन संशोधन आयुक्त नियुक्त किया गया था और आयोग के संदर्भ नियम भी निर्धारित किए गए थे। इसके बाद, 22 फरवरी, 2024 को जी.ओ. एमएस. नंबर 21 के जरिए आयोग के कामकाज के लिए आवश्यक प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी की गई थीं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि PRC की स्थिति को लेकर सरकार की अस्पष्टता राज्य के बौद्धिक कार्यबल में भारी असंतोष पैदा कर रही है। जब सरकार यह स्पष्ट नहीं करती कि आयोग 'भंग' हुआ है या केवल 'प्रमुख विहीन' है, तो विश्वास की कमी पैदा होती है। अंतरिम राहत की मांग केवल पैसों के बारे में नहीं है, बल्कि मुद्रास्फीति के दौर में अपने कर्मचारियों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के बारे में है।
एक व्यक्तिगत अधिकारी के इस्तीफे और एक वैधानिक निकाय के विघटन के बीच अंतर न कर पाना आंध्र प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में प्रशासनिक पक्षाघात का कारण बन रहा है।
संघ का तर्क है कि भले ही आयुक्त ने इस्तीफा दे दिया हो, लेकिन वेतन संशोधन आयोग का विघटन एक अलग मामला है। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार ने वास्तव में 12वें PRC को भंग कर दिया है, तो वह संबंधित सरकारी आदेश (GO) को सार्वजनिक करे। उन्होंने सुझाव दिया कि नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने के बजाय, सरकार को जी.ओ. एमएस. नंबर 68 के तहत गठित आयोग को ही जारी रखना चाहिए और तुरंत एक नया आयुक्त नियुक्त करना चाहिए।
इसके अलावा, संघ ने मांग की है कि वेतन संशोधन आयोग की रिपोर्ट सौंपने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की जाए। चूंकि पहले ही काफी देरी हो चुकी है, इसलिए शिक्षकों और कर्मचारियों को तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए अंतरिम राहत (IR) की घोषणा की जानी चाहिए।
प्रशासनिक स्थिति की तुलना
| पहलू | यूनियन के दावे | शिक्षक संघ का पक्ष |
|---|---|---|
| PRC गठन | अभी तक गठित नहीं हुआ | जी.ओ. एमएस. नंबर 68 द्वारा गठित |
| वर्तमान स्थिति | अस्तित्व में नहीं है | सक्रिय है लेकिन आयुक्त की कमी है |
| आवश्यक कार्रवाई | नई प्रक्रिया शुरू करें | नया आयुक्त नियुक्त करें और IR दें |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 12वां वेतन संशोधन आयोग क्या है?
यह आंध्र प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों की वेतन संरचना और भत्तों की समीक्षा और संशोधन करने के लिए नियुक्त एक राज्य निकाय है।
प्रश्न 2: अंतरिम राहत (IR) क्या होती है?
अंतरिम राहत एक अस्थायी वेतन वृद्धि है जो कर्मचारियों को तब दी जाती है जब वेतन संशोधन आयोग की अंतिम सिफारिशें अभी लंबित होती हैं।