कश्मीर घाटी में PM पैकेज के तहत कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने आतंकी धमकियों के बीच गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने डर जताया है कि उन्हें एक बार फिर विस्थापन की ओर धकेला जा रहा है।
- PM पैकेज कर्मचारियों को आतंकी संगठन ULC से मिल रही हैं गंभीर धमकियां।
- कर्मचारियों के निजी डेटा और फोन नंबर सोशल मीडिया पर लीक किए गए।
- 1990 के दशक के विस्थापन जैसा डर फिर से पैदा होने की आशंका।
- गृहमंत्री से सुरक्षा समीक्षा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग।
जम्मू-कश्मीर की घाटी में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज (PM पैकेज) के तहत तैनात कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने एक बार फिर अपने अस्तित्व और सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। हाल के दिनों में मिल रही सिलसिलेवार धमकियों के बाद, इन कर्मचारियों ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को एक औपचारिक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने अपनी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
ऑल PM पैकेज एम्प्लॉईज फोरम के अध्यक्ष सनी रैना ने इस पत्र के माध्यम से सरकार को आगाह किया है कि भले ही ऊपरी तौर पर घाटी के हालात सामान्य दिख रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत काफी तनावपूर्ण है। कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले 15 वर्षों से अपनी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वर्तमान माहौल उन्हें फिर से उसी विस्थापन के दर्द की याद दिला रहा है जिससे वे 1990 के दशक में गुजरे थे।
धमकियों का स्वरूप और बढ़ता खतरा
रिपोर्ट्स के अनुसार, 'यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल' (ULC) नामक संगठन द्वारा कर्मचारियों को सीधे अल्टीमेटम दिए जा रहे हैं। उन्हें अपनी सरकारी नौकरियां छोड़ने की धमकी दी जा रही है, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई है। यह खतरा केवल पत्रों तक सीमित नहीं है; डिजिटल युग में आतंकवादियों ने एक नया हथियार अपनाया है। कर्मचारियों के निजी फोन नंबर, घर के पते और यहां तक कि उनकी गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर भी ऑनलाइन लीक कर दिए गए हैं, जिससे उनके परिवारों में दहशत का माहौल है।
BozokMedia analysis shows that this is not just a security breach but a psychological warfare tactic designed to create a 'climate of fear'. By leaking personal data, terror elements aim to isolate the minority community and signal that the state cannot protect them even in their private spaces. This puts the entire PM Package initiative, intended for the return of displaced persons, at a critical crossroads.
"The repetition of threat-letters and data leaks is a calculated move to trigger the collective trauma of the 1990 exodus among Kashmiri Pandits."
कर्मचारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि वे घाटी छोड़ना नहीं चाहते क्योंकि उन्होंने अपनी पूरी मेहनत से यहां अपना घर बसाया है। हालांकि, ट्रांजिट कॉलोनियों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना और कई कर्मचारियों का अब भी किराए के कमरों में रहना उनकी असुरक्षा को और बढ़ाता है। 2022 में राहुल भट की हत्या ने पहले ही इस डर को पुख्ता कर दिया था।
अमित शाह से प्रमुख मांगें
पत्र में गृहमंत्री से मांग की गई है कि धमकियों की गंभीरता से जांच हो और दोषियों को सख्त सजा मिले। इसके अलावा, आवासीय कॉलोनियों की सुरक्षा समीक्षा करने और एक त्वरित शिकायत तंत्र (Immediate Complaint System) बनाने की अपील की गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षा बल तुरंत कार्रवाई कर सकें।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: PM पैकेज क्या है?
उत्तर: यह केंद्र सरकार की एक योजना है जिसके तहत विस्थापित कश्मीरी पंडितों को कश्मीर घाटी में वापस बसाने और उन्हें सरकारी नौकरियां प्रदान करने का प्रावधान है।
प्रश्न 2: कर्मचारियों को कौन धमकी दे रहा है?
उत्तर: धमकियों के पीछे मुख्य रूप से 'यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल' (ULC) नामक संगठन का हाथ बताया जा रहा है।