कटिहार जिले के प्राणपुर प्रखंड में ग्रामीणों ने दावा किया कि नया प्राथमिक विद्यालय ‘चोरी’ हो गया है। जाँच में पता चला कि टेंडर, भुगतान और निर्माण का कोई रिकॉर्ड नहीं था, और दस्तावेज़ ChatGPT से बनाए गए थे। यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और डिजिटल दस्तावेज़ीकरण के खतरों को उजागर करता है।

वीडियो लोड हो रहा है...
  • ग्रामवासियों ने 44.85 लाख रुपये के स्कूल निर्माण का दावा किया, पर स्थल पर कोई ईंट नहीं मिली।
  • जांच में टेंडर, भुगतान और निर्माण प्रमाणपत्र के रिकॉर्ड अनुपस्थित पाए गए।
  • दस्तावेज़ों को ChatGPT द्वारा तैयार किया गया बताया गया।

कटिहार के प्राणपुर प्रखंड के नया प्राथमिक विद्यालय दीघापार में एक अजीब घटना सामने आई। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़े के साथ जिला प्रशासन के पास पहुँचकर दावा किया कि उनका पूरा स्कूल ‘चोरी’ हो गया है। दावा के अनुसार, 44.85 लाख रुपये का निर्माण बजट जारी किया गया था और तीन किस्तों में भुगतान किया गया था।

पृष्ठभूमि और दावे

गांव के मुखियाओं ने बताया कि 2024 में विद्यालय निर्माण हेतु टेंडर प्रक्रिया हुई और 2025 में निर्माण पूरा होने का प्रमाणपत्र जारी हुआ। ग्रामीणों के अनुसार, 18 अप्रैल 2024 को 15 लाख रुपये, 28 सितंबर 2024 को फिर 15 लाख और 12 मार्च 2025 को 14 लाख 85 हजार रुपये का भुगतान हुआ। पर स्थल पर नदीनुमा टापू जैसी स्थिति थी और कोई इमारत भी नहीं बनी थी।

जांच के परिणाम

एसडीएम सूरज कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी राहुल चंद्र चौधरी और अन्य अधिकारियों ने स्थल पर जाँच की। इ-प्रोक्योरमेंट और बैंक रिकॉर्ड में उक्त टेंडर (2024_BSEB_314680-1) और किसी भी धनराशि का निकास नहीं मिला। टेंडर पहले ही रद्द हो चुका था।

“डिजिटल दस्तावेज़ीकरण में अनियंत्रित AI का प्रयोग, सार्वजनिक विश्वास को गहरा खतरा पहुंचा सकता है।” – राजनैतिक विश्लेषक, डॉ. अनिल कुमार।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहनशीलता का दावा किया है। इस तरह का फर्जी दावा और नकली दस्तावेज़ीकरण, सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग के आरोपों को और भी जटिल बनाता है। यह घटना AI आधारित फ़ेक दस्तावेज़ों के बढ़ते खतरे को दर्शाती है, जिससे सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की मांग और बढ़ती है।

Did You Know?: ChatGPT जैसे भाषा मॉडल से उत्पन्न दस्तावेज़, अगर सही ढंग से जाँचे न जाएँ, तो उन्हें वैध सरकारी कागजात समझा जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या दीघापार में वास्तव में कोई स्कूल बना है?
उत्तर 1: नहीं, स्थल पर किसी भी निर्माण के निशान नहीं मिले।

प्रश्न 2: क्या किसी सरकारी अधिकारी पर इस फर्जी दस्तावेज़ के लिए दायित्व है?
उत्तर 2: वर्तमान में जाँच चल रही है, पर अभी तक किसी पर कोई औपचारिक आरोप नहीं लगाया गया है।