कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने सोनम वांगचुक से स्वास्थ्य कारणों से अनशन समाप्त करने की अपील की है, साथ ही NEET अनियमितताओं को लेकर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अडिग रहने का संकल्प लिया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सोनम वांगचुक 19 दिनों से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।
  • कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को जारी रखने का वादा किया है।
  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने वांगचुक के स्वास्थ्य की दैनिक निगरानी के निर्देश दिए हैं।
  • विरोध का मुख्य कारण NEET परीक्षा में कथित अनियमितताएं और जवाबदेही की कमी है।

नई दिल्ली में जारी राजनीतिक तनाव के बीच, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से उनके स्वास्थ्य को देखते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की है। वांगचुक पिछले 19 दिनों से जंतर-मंतर पर केंद्र सरकार के खिलाफ अनशन पर बैठे हैं, जो अब एक गंभीर मानवीय और राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।

NEET विवाद और राजनीतिक मोर्चा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक महत्वपूर्ण संदेश साझा करते हुए कहा कि वांगचुक की चिंताएं केवल उनकी नहीं, बल्कि समस्त विपक्षी दलों की चिंताएं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी NEET परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरना जारी रखेगी। पार्टी का मुख्य लक्ष्य केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सुनिश्चित करना है, जिसे कांग्रेस ने परीक्षा प्रणाली के पतन के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

न्यायालय का हस्तक्षेप और स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं

वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए, दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है। न्यायालय ने केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वे वांगचुक की चिकित्सकीय स्थिति की 'क्लिनिकल' रूप से दैनिक आधार पर निगरानी सुनिश्चित करें। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी नागरिक का जीवन अनमोल है और सरकार को उनकी सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए।

विरोध प्रदर्शन का व्यापक परिदृश्य

यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है; कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जैसे संगठन भी पिछले 25 दिनों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। वांगचुक के इस संघर्ष ने देश भर में शिक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही पर एक नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल अब इस मुद्दे को संसद में और सड़क पर और अधिक आक्रामक तरीके से उठाने की तैयारी कर रहे हैं।