कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने संसद में सीमांकन बिल पेश होने से पहले विपक्ष को पर्याप्त अध्ययन समय देने की मांग की। उन्होंने सभी‑पक्षीय बैठक का भी आग्रह किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- खरगे ने सभी‑पक्षीय बैठक की माँग की
- विपक्ष को सीमांकन प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय चाहिए
- समकालीन राजनीतिक तनाव और दक्षिणी राज्यों की चिंताएँ प्रमुख कारण हैं
कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने सरकार द्वारा प्रस्तुत सीमांकन प्रस्तावों पर चर्चा हेतु एक सभी‑पक्षीय बैठक का आयोजन करने का आग्रह किया। यह पत्र मार्च 2026 से लिखे जा रहे कई अनुरोधों के बाद सार्वजनिक किया गया, जब खरगे ने संसद मामलों के मंत्री किरण रिजिजु को भी समान अनुरोध किया था, लेकिन वह स्वीकार नहीं किया गया।
सीमांकन का पृष्ठभूमि और 131वां संशोधन बिल
सीमांकन का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभा के निर्वाचन क्षेत्रों को जनसंख्या के अनुसार पुनः व्यवस्थित करना है, ताकि प्रतिनिधित्व का संतुलन बना रहे। 2026 में पेश किया गया संविधान (131वां संशोधन) बिल, जिसमें सीमांकन के साथ‑साथ महिलाओं के कोटा को भी शामिल किया गया था, को 17 अप्रैल को लोकसभा में दो‑तिहाई बहुमत नहीं मिला। इस विफलता के बाद सरकार ने प्रस्तावों में संशोधन किया, जिससे दक्षिणी राज्यों की जनसंख्या‑आधारित सीमांकन से संभावित शक्ति हानि को कम किया जा सके।
दक्षिणी राज्यों की चिंताएँ और राजनीतिक माहौल
दक्षिणी राज्यें, विशेषकर तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश, ने लंबे समय से कहा है कि जनसंख्या‑आधारित सीमांकन से उनके प्रतिनिधित्व में कमी आएगी। इस परिप्रेक्ष्य में सरकार ने सीटों की संख्या को 50% बढ़ाने की योजना का उल्लेख किया, ताकि संभावित हानि को संतुलित किया जा सके। विपक्ष ने इसे राजनीतिक संतुलन बिगाड़ने की कोशिश के रूप में देखा, जबकि सरकार इसे समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के कदम के रूप में पेश कर रही है।
कांग्रेस का रणनीतिक कदम
खरगे के पत्र के बाद, कांग्रेस ने 16 जुलाई को नई दिल्ली में एक रणनीतिक बैठक आयोजित की, जहाँ राहुल गांधी, अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ, मौन सत्र (जुलाई‑20 से शुरू) के एजेंडा पर चर्चा कर रहे हैं। पार्टी ने सभी‑पक्षीय मंच पर पारदर्शिता और समय सीमा की मांग को प्रमुख बिंदु बनाया, जिससे उनके विरोधी दलों के साथ संवाद को सुदृढ़ किया जा सके।
यदि सरकार इस अनुरोध को स्वीकार करती है, तो यह संसद के मौन सत्र में एक महत्वपूर्ण बिंदु बन सकता है, जो न केवल सीमांकन पर बल्कि व्यापक संवैधानिक सुधारों पर भी केंद्रित होगा। विपक्ष के लिए यह अवसर है कि वे अपने विचारों को व्यापक रूप से प्रस्तुत कर सकें और संभावित संशोधनों को प्रभावित कर सकें।