BRSLP के उप फ्लोर लीडर टी. हरीश राव ने राजस्व मंत्री पोंगुलेती श्रीनिवास रेड्डी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए राहुल गांधी को पत्र लिखा है। उन्होंने भूमि पंजीकरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की जांच के लिए न्यायिक आयोग की मांग की है।

  • टी. हरीश राव ने राजस्व मंत्री पोंगुलेती श्रीनिवास रेड्डी को पद से हटाने की मांग की।
  • पंजीकरण अधिनियम की धारा 22A के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया।
  • रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच की मांग।
  • निजी संपत्तियों को अवैध रूप से सरकारी भूमि घोषित करने का दावा।

तेलंगाना की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। BRSLP के उप फ्लोर लीडर टी. हरीश राव ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को एक औपचारिक पत्र लिखकर राज्य में राजस्व विभाग और पंजीकरण प्रक्रिया में व्यापक भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का मुद्दा उठाया है। राव ने सीधे तौर पर राजस्व मंत्री पोंगुलेती श्रीनिवास रेड्डी की जवाबदेही तय करते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है।

हरीश राव का मुख्य आरोप यह है कि 'पंजीकरण अधिनियम, 1908' की धारा 22A का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राजस्व और पंजीकरण मशीनरी का इस्तेमाल निजी संपत्तियों, जिनमें HMDA और GHMC द्वारा अनुमोदित लेआउट और पट्टा भूमि शामिल हैं, को सरकारी या 'सीलिंग-सरप्लस' भूमि के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत करने के लिए किया जा रहा है। इससे हजारों वैध संपत्ति मालिकों को भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद केवल राजनीतिक नहीं है, बल्कि यह तेलंगाना के रियल एस्टेट बाजार और मध्यम वर्ग की संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा है। यदि निजी संपत्तियों को बिना उचित आधार के प्रतिबंधित श्रेणी में डाला जाता है, तो इससे न केवल बाजार में अनिश्चितता पैदा होती है, बल्कि बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान भी होता है।

राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर और निजी संपत्तियों का सरकारी वर्गीकरण राज्य के भूमि प्रशासन में एक गहरे संकट का संकेत देता है।

राव ने विशेष रूप से हैदराबाद, मेचल-मल्काजगिरि, रंगारेड्डी और संगारेड्डी जिलों का उल्लेख किया है, जहां हजारों संपत्तियों को प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो संपत्तियां पहले अर्बन लैंड सीलिंग (ULC) ढांचे के तहत नियमित की गई थीं, उन्हें फिर से वर्गीकृत कर दिया गया है, जिससे उनके मालिकाना हक पर सवाल खड़े हो गए हैं।

पत्र में मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर भी निशाना साधा गया है। राव ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सार्वजनिक चिंताओं और चल रहे कानूनी मामलों के बावजूद एक स्वतंत्र भ्रष्टाचार विरोधी जांच का आदेश देने में विफल रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के नेतृत्व में एक जांच आयोग नियुक्त किया जाए जो बीभू भारती रिकॉर्ड में बदलाव, अवैध वसूली और अधिकारियों की भूमिका की गहराई से जांच कर सके।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

तेलंगाना में भूमि रिकॉर्ड और पंजीकरण (Section 22A) हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। धारा 22A का उपयोग उन संपत्तियों को सूचीबद्ध करने के लिए किया जाता है जिनका पंजीकरण प्रतिबंधित है। हालांकि, इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी अक्सर राजनीतिक विवादों और कानूनी मुकदमों का कारण बनती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. टी. हरीश राव ने क्या मांग की है?
उन्होंने राजस्व मंत्री को हटाने और भूमि पंजीकरण अनियमितताओं की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग बनाने की मांग की है।

2. धारा 22A विवाद का क्या अर्थ है?
यह विवाद निजी संपत्तियों को गलत तरीके से सरकारी भूमि के रूप में वर्गीकृत करने और उनके पंजीकरण को रोकने से संबंधित है।