मणिपुर राज्य दिल्ली के जनगणना निर्णय का इंतजार कर रहा है, जबकि मेइती और नागा समूह राष्ट्रीय नागरिक रजिस्ट्री (NRC) को पहले लागू करने की मांग कर रहे हैं। हाई कोर्ट ने इस मुद्दे पर विशेष पैनल बनाकर मंगलवार को सुनवाई तय की।
- दिल्ली से जनगणना संबंधी निर्णय अभी तक नहीं आया
- मेइती‑नागा समूह NRC पहले चाहते हैं
- मणिपुर हाई कोर्ट ने कांगलीपाक स्टूडेंट्स एसोसिएशन की याचिका पर विशेष पैनल गठित किया
स्थिति का वर्तमान सारांश
भारत सरकार के जनगणना विभाग (RG&CCI) ने अभी तक मणिपुर में 2027 की जनगणना के लिए स्पष्ट दिशा‑निर्देश नहीं दिए हैं। कई मेइती और नागा नागरिक समाज समूहों ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्ट्री (NRC) को पहले तैयार करने की मांग की है, जिससे जनगणना का कार्य अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
सिविल सोसाइटी की माँगें
कांगलीपाक स्टूडेंट्स एसोसिएशन (KSA) सहित कम से कम 14 समूह दिल्ली में मणिपुर सरकार के साथ मुलाक़ात की और NRC के कार्यान्वयन की अनिवार्यता पर ज़ोर दिया। वे यह भी उजागर कर रहे हैं कि 2023‑2024 में कुकि‑मेइती संघर्ष के कारण विस्थापित लोगों की बड़ी संख्या ने जनसांख्यिकीय डेटा को विकृत कर दिया है।
हाई कोर्ट की विशेष पैनल सुनवाई
मणिपुर हाई कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश एम. सुंदर और न्यायाधीश ए. गुनेश्वर शर्मा के साथ एक विशेष विभाजन पैनल का गठन किया। यह पैनल 25 अगस्त को दोपहर 2 बजे KSA की याचिका सुनने के लिए निर्धारित है। कोर्ट ने कहा कि यह सुनवाई केवल इस विशेष याचिका पर ही केंद्रित होगी।
जनगणना कार्य में बाधाएँ
जनगणना के प्रथम चरण (जनसंख्या, हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग) को 1 से 30 सितंबर तक मणिपुर में आयोजित करने की योजना है। परंतु शिक्षक‑आधारित एंयुमरेटरों का प्रशिक्षण विरोध के कारण रुका हुआ है और स्वयं‑एंयुमरेशन पोर्टल अभी तक सक्रिय नहीं हुआ है। राज्य के एक अधिकारी ने कहा, "MHA से निर्णय की प्रतीक्षा है, जल्द ही स्पष्टता आएगी।"
"NRC को पहले लागू करने की मांग केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व के संतुलन को भी दर्शाती है," राजनीतिक विश्लेषक डॉ. रजत सिंह ने कहा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
2011 में छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कई गांवों में बाएँ पंख के उग्रवाद (LWE) के कारण जनगणना नहीं हो पाई थी। मणिपुर में भी 2023‑2024 के कुकि‑मेइती संघर्ष ने समान चुनौतियां उत्पन्न कीं, जिससे विस्थापन और सामाजिक तनाव बढ़ा।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that delaying the census without a clear NRC framework could distort demographic data, affect resource allocation, and influence the upcoming delimitation of electoral constituencies, potentially marginalizing minority tribes.
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या NRC के बिना जनगणना शुरू होगी?
उत्तर: वर्तमान में सरकार NRC को पहले लागू करने की मांग को गंभीरता से ले रही है, इसलिए जनगणना में संभावित देरी हो सकती है।
प्रश्न 2: हाई कोर्ट की सुनवाई का संभावित परिणाम क्या हो सकता है?
उत्तर: यदि कोर्ट NRC को प्राथमिकता देने की सिफ़ारिश करती है, तो जनगणना का शेड्यूल पुनः निर्धारित किया जा सकता है।