शंघाई सहयोग संगठन (SCO) ने बिश्केक घोषणापत्र के माध्यम से ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों की निंदा की है और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के ईरान के अधिकारों का समर्थन किया है।
- SCO ने ईरान पर सैन्य हमलों और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों की निंदा की।
- संगठन ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के अधिकार का समर्थन किया।
- सदस्य देशों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए एक पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण व्यापार प्रणाली पर जोर दिया।
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के बाद, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। इस 'बिश्केक घोषणापत्र' पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सहित अन्य सदस्य देशों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं। इस घोषणापत्र में विशेष रूप से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाइयों और पश्चिमी प्रतिबंधों पर कड़ा रुख अपनाया गया है।
SCO ने ईरान के क्षेत्र में हुए सैन्य हमलों की तीव्र निंदा की है, जिससे बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हुए हैं और देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है। संगठन का मानना है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम पैदा हो गया है। इसके साथ ही, सदस्य देशों ने ईरान के सर्वोच्च नेता सैय्यद अली खामेनेई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम पश्चिमी प्रभुत्व वाले वैश्विक वित्तीय और राजनीतिक ढांचे के खिलाफ एक संगठित चुनौती है। जब अमेरिका और इजरायल ईरान को अलग-थलग करने की कोशिश कर रहे हैं, तब SCO जैसे बड़े समूह का समर्थन ईरान को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सुरक्षा कवच प्रदान करता है। यह दर्शाता है कि वैश्विक शक्ति संतुलन अब केवल पश्चिम की इच्छा पर निर्भर नहीं है।
घोषणापत्र में फिलिस्तीन के मुद्दे पर भी बात की गई है। SCO ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में स्थिरता तभी संभव है जब फिलिस्तीन प्रश्न का व्यापक और न्यायसंगत समाधान निकाला जाए। इसके अलावा, संगठन ने उन सभी 'एकतरफा जबरन उपायों' (Unilateral Coercive Measures) का विरोध किया जो विश्व व्यापार संगठन (WTO) और संयुक्त राष्ट्र के नियमों के विरुद्ध हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।
"बिश्केक घोषणापत्र केवल एक राजनयिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर एक स्पष्ट संकेत है जहाँ क्षेत्रीय संप्रभुता को पश्चिमी प्रतिबंधों से ऊपर रखा गया है।"
परमाणु मुद्दे पर, SCO ने ईरान के परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के अधिकारों का पुरजोर समर्थन किया। हालांकि अमेरिका ने ईरान पर परमाणु बम बनाने का आरोप लगाया है, लेकिन SCO ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा विकसित करने और उसका उपयोग करने का अटूट अधिकार है।
आर्थिक मोर्चे पर, सदस्य देशों ने 2030 तक की 'SCO आर्थिक विकास रणनीति' को लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है। विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर युद्ध के कारण बाधित व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को बहाल करने के लिए वित्तीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की गई।
| मुद्दा | पश्चिमी दृष्टिकोण (US/Israel) | SCO दृष्टिकोण |
|---|---|---|
| ईरान परमाणु कार्यक्रम | परमाणु हथियार बनाने का संदेह | शांतिपूर्ण उपयोग का NPT अधिकार |
| प्रतिबंध | सुरक्षा के लिए आवश्यक | एकतरफा और अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक |
| सैन्य कार्रवाई | परमाणु प्रसार रोकने के लिए जरूरी | अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन |
Frequently Asked Questions
1. बिश्केक घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य ईरान पर हमलों की निंदा करना, सदस्य देशों की संप्रभुता का समर्थन करना और पश्चिमी प्रतिबंधों के खिलाफ एकजुट होना है।
2. NPT के संदर्भ में SCO ने क्या कहा?
SCO ने कहा कि ईरान को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा का उपयोग करने का पूरा अधिकार है और इसे प्रतिबंधित करना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।