मंत्री एच.एम. रेवन्ना ने घोषणा की कि मृत लाभार्थियों को ₹117.30 करोड़ के गलत भुगतान के बाद, सरकार 10 दिनों के भीतर गृह लक्ष्मी योजना का बायोमेट्रिक पुन: सत्यापन शुरू करेगी।
- गृह लक्ष्मी लाभार्थियों का बायोमेट्रिक पुन: सत्यापन 10 दिनों में शुरू होगा।
- राज्य भर में 3.13 लाख मृत लाभार्थियों को ₹117.30 करोड़ का भुगतान किया गया।
- गृह ज्योति पुन: सत्यापन 60% पूरा हो चुका है, एक महीने में समाप्त होगा।
- इंदिरा किट के तहत चीनी, दाल, तेल और नमक का वितरण जल्द शुरू होगा।
कल्याणकारी योजनाओं में होने वाली लीकेज को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए, राज्य स्तरीय गारंटी योजना कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष एच.एम. रेवन्ना ने मंगलवार को घोषणा की कि कर्नाटक सरकार गृह लक्ष्मी योजना के लाभार्थियों का व्यापक पुन: सत्यापन शुरू करेगी। अगले 10 दिनों के भीतर, सरकारी अधिकारी लाभार्थियों के घर-घर जाकर उनके बायोमेट्रिक विवरण एकत्र करेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वित्तीय सहायता केवल पात्र जीवित व्यक्तियों तक पहुंचे।
यह निर्णय प्रशासन द्वारा एक चौंकाने वाले खुलासे के बाद लिया गया है। मंत्री रेवन्ना के अनुसार, सरकार ने पाया कि लगभग 3.13 लाख मृत लाभार्थियों को उनकी मृत्यु के बाद भी मासिक किश्तें मिलती रहीं। इस प्रशासनिक चूक के कारण कुल ₹117.30 करोड़ का भुगतान हुआ। हालांकि सरकार ने अब तक ₹30 करोड़ की वसूली कर ली है, लेकिन इस बड़ी गलती ने तत्काल बायोमेट्रिक ऑडिट को आवश्यक बना दिया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह कदम कल्याणकारी वितरण में साधारण डेटाबेस प्रबंधन से हटकर सक्रिय बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की ओर एक बदलाव है। पंचायत और वार्ड स्तर की समितियों—जिसमें नियुक्त कांग्रेस कार्यकर्ता भी शामिल होंगे—को शामिल करके, सरकार 'घोस्ट बेनिफिशियरीज' (फर्जी लाभार्थियों) को खत्म करने का प्रयास कर रही है जो सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
इसका प्रभाव विशेष रूप से दक्षिण कन्नड़ में देखा गया, जहाँ 3,478 मृत लाभार्थियों को ₹3.35 करोड़ मिले, जिनमें से केवल ₹1.43 करोड़ ही वसूले जा सके हैं। यह क्षेत्रीय डेटा वित्तीय वितरण प्रणालियों के साथ मृत्यु रजिस्ट्रियों को वास्तविक समय में अपडेट करने की प्रणालीगत चुनौती को उजागर करता है।
"उच्च-मात्रा वाले प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजनाओं में वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन एक आवश्यक विकास है।"
गृह लक्ष्मी के अलावा, मंत्री ने अन्य गारंटी योजनाओं पर भी अपडेट दिए। गृह ज्योति का पुन: सत्यापन पहले ही 60% पूरा हो चुका है, जिसमें 1.64 करोड़ लाभार्थी शामिल हैं और अब तक ₹28,759 करोड़ खर्च किए गए हैं। इसके अलावा, सरकार इंदिरा किट लॉन्च करने की तैयारी कर रही है, जिसमें अन्न भाग्य योजना के 5 किलो चावल के स्थान पर चीनी, दाल, तेल और नमक दिया जाएगा, जिसकी खरीद जिला स्तरीय निविदाओं के माध्यम से की जाएगी।
कुल मिलाकर, पांच गारंटी योजनाओं के तहत ₹1.47 लाख करोड़ का वितरण किया गया है। सरकार का दावा है कि इन पहलों ने विशेष रूप से महिलाओं को सशक्त बनाया है और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभार्थियों को औसतन ₹6,000 प्रति माह का लाभ मिला है।
| योजना | कुल लाभार्थी (राज्य) | कुल व्यय | सत्यापन स्थिति |
|---|---|---|---|
| गृह लक्ष्मी | 1.23 करोड़ | ₹76,951 करोड़ | 10 दिनों में शुरू |
| गृह ज्योति | 1.64 करोड़ | ₹28,759 करोड़ | 60% पूर्ण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: पुन: सत्यापन कैसे किया जाएगा?
अधिकारी वार्ड और पंचायत स्तर की समितियों की सहायता से प्रत्येक लाभार्थी के घर जाकर बायोमेट्रिक विवरण एकत्र करेंगे।
प्रश्न 2: इंदिरा किट में क्या शामिल होगा?
किट में चीनी, दाल, तेल और नमक शामिल होगा, जो पिछले 5 किलो चावल के प्रावधान का स्थान लेगा।