तमिलनाडु के कानून मंत्री ने इंजीनियरिंग छात्र अमृतन की हत्या के पीछे मादक पदार्थों के व्यापार के दावों को खारिज करते हुए इसे छात्रों के बीच आपसी झड़प बताया है। सरकार ने पीड़ित के परिवार को ₹6 लाख का मुआवजा और भाई को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है।
- कानून मंत्री आर निरमलकुमार ने अमृतन की हत्या को प्रतिशोधी समूह संघर्ष का परिणाम बताया।
- सरकार ने इस दावे को खारिज किया कि हत्या ड्रग्स की शिकायत करने के कारण हुई।
- 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम लागू किया गया है।
- पीड़ित परिवार को ₹6 लाख का मुआवजा और भाई को सरकारी नौकरी का प्रस्ताव।
17 अगस्त, 2026 को तमिलनाडु विधानसभा के एक हंगामेदार सत्र के दौरान, कानून मंत्री आर निरमलकुमार ने कोयंबटूर के मलमिचम्पट्टी के तीसरे वर्ष के इंजीनियरिंग छात्र अमृतन की दुखद मृत्यु पर बात की। मंत्री ने विपक्षी दलों के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि हत्या का कारण नशीले पदार्थों का व्यापार या पुलिस द्वारा शिकायत लीक करना था।
घटनाक्रम के अनुसार, यह विवाद 9 अगस्त को शुरू हुआ जब चौथे वर्ष के छात्रों ने अमृतन और उसके कनिष्ठ साथियों पर हमला किया। कानून मंत्री ने बताया कि अगले दिन 10 अगस्त को सुबह करीब 5 बजे, अमृतन के समूह ने ओट्टैकलमंडापम और पूनगा नगर में वरिष्ठ छात्रों के कमरों पर पलटवार किया और उनके मोबाइल फोन छीनकर फरार हो गए।
हिंसा का चरम उसी दिन सुबह 8:30 बजे आया, जब चौथे वर्ष के छात्रों ने अमृतन और उसके दोस्तों को रास्ते में रोका और उन पर हमला किया। अमृतन को एक मैदान में ले जाकर बेरहमी से पीटा गया और बाद में उसे एक दोस्त के कमरे में बेहोश छोड़ दिया गया। दोपहर 3 बजे जब उसे अस्पताल ले जाया गया, तब तक डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल कैंपस की लड़ाई नहीं है। इस मामले में SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम का उपयोग तमिलनाडु में जातिगत समीकरणों और छात्र हिंसा के गहरे संबंधों को दर्शाता है। ड्रग्स के एंगल को लेकर सत्ता पक्ष और डीएमके (DMK) के बीच का टकराव राज्य में सुरक्षा और नशीले पदार्थों के प्रबंधन पर एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई बन गया है।
SC/ST अधिनियम का त्वरित उपयोग और तीन महीने में चार्जशीट का वादा सार्वजनिक आक्रोश को शांत करने और सीबीआई जांच की मांग को रोकने का एक प्रयास है।
सरकार ने पीड़ित परिवार की सहायता के लिए कदम उठाए हैं। सामाजिक न्याय मंत्री वन्नी अरसु और पिछड़ा वर्ग मंत्री वी. संपत कुमार ने माता-पिता से मुलाकात की और ₹6 लाख का मुआवजा दिया। साथ ही, परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए अमृतन के भाई को सरकारी नौकरी देने का आश्वासन दिया गया है।
इन आश्वासनों के बावजूद, उधयनidhi स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया। उनका तर्क है कि सरकार तथ्यों को छिपा रही है और इस हत्या के पीछे ड्रग माफिया का हाथ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: अमृतन हत्याकांड में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
इस मामले से जुड़ी दो अलग-अलग एफआईआर में अब तक कुल 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
प्रश्न 2: कानूनी कार्रवाई के लिए सरकार की समयसीमा क्या है?
कानून मंत्री आर निरमलकुमार ने आश्वासन दिया है कि अगले तीन महीनों के भीतर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।