दिल्ली हाईकोर्ट में एक नई जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने और 13-16 वर्ष के बच्चों के लिए सामग्री को विनियमित करने की मांग की गई है।
मुख्य बातें
- 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग।
- 13 से 16 वर्ष के बच्चों के लिए सामग्री विनियमन (Content Regulation) का प्रस्ताव।
- मेटा, गूगल और एक्स जैसी कंपनियों के लिए सख्त आयु-सत्यापन प्रणाली की आवश्यकता।
- डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ते खतरों का हवाला।
दिल्ली उच्च न्यायालय में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें केंद्र सरकार से बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त दिशा-निर्देश और कानून बनाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता कीर्ति दुआ और एक बाल रोग विशेषज्ञ का तर्क है कि सोशल मीडिया पर लत लगाने वाली सामग्री की आसान उपलब्धता बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन गई है।
याचिका में विशेष रूप से मांग की गई है कि 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर रोक लगाई जाए और 13 से 16 वर्ष के किशोरों के लिए सामग्री को नियंत्रित किया जाए। याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में भारत में नाबालिगों के लिए कोई मजबूत, गोपनीयता बनाए रखने वाली डिजिटल आईडी प्रणाली नहीं है, जिससे तकनीकी रूप से सक्षम बच्चे फर्जी जन्मतिथि और नकली ईमेल का उपयोग करके आसानी से प्रतिबंधों को दरकिनार कर देते हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के 'इनफिनिट स्क्रॉल' और 'ऑटोप्ले' जैसे फीचर्स बच्चों के मस्तिष्क को लक्षित करते हैं, जिससे डिजिटल लत की समस्या बढ़ रही है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के आंकड़े भी बच्चों और युवाओं के बीच बढ़ती डिजिटल लत की पुष्टि करते हैं।
तकनीकी सुरक्षा उपायों की वर्तमान कमी बच्चों को साइबर बुलिंग और हानिकारक सामग्री के प्रति असुरक्षित बनाती है।
याचिका में Meta, Alphabet (Google), Telegram, Snap और X जैसी दिग्गज टेक कंपनियों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे अपनी आयु-सत्यापन प्रणालियों को और अधिक मजबूत बनाएं। हालांकि सरकार ने साइबर अपराधों को रोकने के लिए कई प्रेस विज्ञप्तियां जारी की हैं, लेकिन याचिका के अनुसार, इन कार्यों को लागू करने के लिए अभी तक कोई ठोस तंत्र स्थापित नहीं किया गया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले कुछ वर्षों में, दुनिया भर में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर बहस तेज हुई है। कई देशों ने किशोरों के लिए डिजिटल सुरक्षा कानूनों को सख्त किया है, जिससे भारत में भी इस दिशा में कानूनी कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: याचिका में किन आयु समूहों पर ध्यान केंद्रित किया गया है?
उत्तर: याचिका 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंध और 13-16 वर्ष के बच्चों के लिए सामग्री विनियमन की मांग करती है।
प्रश्न 2: किन कंपनियों को इस याचिका का लक्ष्य बनाया गया है?
उत्तर: याचिका में मेटा, गूगल, टेलीग्राम, स्नैप और एक्स जैसी प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों को शामिल किया गया है।