दिल्ली हाईकोर्ट ने मेटा से उसके 'राइट्स मैनेजर' टूल के लिए पात्रता मानदंडों और नीतियों पर जवाब मांगा है। यह कदम तब उठाया गया जब यह आरोप लगा कि जालसाज कॉपीराइट सुरक्षा तंत्र का दुरुपयोग कर मूल सामग्री को निशाना बना रहे हैं।

मुख्य बातें

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने मेटा से 'राइट्स मैनेजर' के एक्सेस मानदंडों पर स्पष्टीकरण मांगा है।
  • आरोप है कि स्कैमर्स कॉपीराइट टूल्स का उपयोग करके असली क्रिएटर्स को निशाना बना रहे हैं।
  • एक कंटेंट क्रिएटर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह निर्देश दिया।
  • कोर्ट ने पाया कि कॉपीराइट प्रवर्तन तंत्र का दुरुपयोग बढ़ते विवादों का कारण बन रहा है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को मेटा (Meta) से उसके 'राइट्स मैनेजर' (Rights Manager) टूल तक पहुंच प्रदान करने वाली नीति पर स्पष्टता मांगी है। न्यायमूर्ति अनुप जयराम भाम्भानी ने मेटा को निर्देश दिया है कि वह उन मानदंडों और पात्रता मानदंडों को रिकॉर्ड पर रखे जिनके आधार पर इस टूल तक पहुंच दी जाती है, साथ ही उन कारणों का भी विवरण दे कि आवेदनों को क्यों खारिज किया जा सकता है।

कॉपीराइट का दुरुपयोग और स्कैमर्स का खतरा

यह मामला तब गरमाया जब कंटेंट क्रिएटर और बिजनेस कोच मोहित कुमार (Rise With Mohit) ने अदालत में याचिका दायर की। कुमार का आरोप है कि जालसाज पहले उनके मूल वीडियो को कॉपी करके मेटा के 'राइट्स मैनेजर' पर अपलोड कर देते हैं और खुद को असली अधिकार धारक के रूप में पेश करते हैं। इसके बाद, वे उन्हीं फर्जी पंजीकरणों का उपयोग करके कुमार के खातों पर कॉपीराइट स्ट्राइक जारी करवाते हैं।

BozokMedia विश्लेषण: डिजिटल सुरक्षा में बड़ी चूक

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मेटा जैसे बड़े प्लेटफार्मों पर कॉपीराइट सुरक्षा तंत्र का दुरुपयोग एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। यदि सुरक्षा तंत्र ही जालसाजों का हथियार बन जाए, तो असली रचनाकारों की आजीविका और डिजिटल पहचान खतरे में पड़ सकती है।

कॉपीराइट टूल्स का दुरुपयोग न केवल रचनाकारों की रचनात्मक स्वतंत्रता को बाधित करता है, बल्कि डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में विश्वास को भी खत्म करता है।

सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि मोहित कुमार के आवेदन तीन बार खारिज किए गए थे, बिना किसी स्पष्ट कारण के। उनके वकील ने तर्क दिया कि जहां छोटे क्रिएटर्स को यह टूल मिल रहा है, वहीं बड़े और स्थापित क्रिएटर्स को इससे वंचित रखा जा रहा है, जिससे उनके व्यावसायिक सहयोग और दर्शकों के साथ जुड़ाव पर बुरा असर पड़ रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: कॉपीराइट का बदलता स्वरूप

डिजिटल युग में, कॉपीराइट कानून अब केवल भौतिक वस्तुओं तक सीमित नहीं हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 'कंटेंट आईडी' और 'राइट्स मैनेजर' जैसे टूल्स को सुरक्षा के लिए बनाया गया था, लेकिन एल्गोरिदम की खामियों के कारण अब ये 'कॉपीराइट ट्रोलिंग' का जरिया बन गए हैं।

क्या आप जानते हैं?: 'कॉपीराइट स्ट्राइक' मिलने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अक्सर सामग्री को तुरंत हटा देते हैं, जिसे बाद में जांच के बाद बहाल किया जा सकता है, लेकिन इस बीच क्रिएटर का नुकसान हो चुका होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. मेटा का 'राइट्स मैनेजर' क्या है?
यह मेटा द्वारा प्रदान किया गया एक टूल है जो कंटेंट क्रिएटर्स को उनके वीडियो और अन्य सामग्री पर कॉपीराइट नियंत्रण रखने में मदद करता है।

2. अदालत ने मेटा से क्या मांगा है?
अदालत ने मेटा से उस प्रक्रिया और पात्रता मानदंडों की मांग की है जिसके तहत इस टूल का एक्सेस दिया जाता है।