सुप्रीम कोर्ट ने राजमार्गों पर अवैध पार्किंग और अतिक्रमण के कारण होने वाली मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए NHAI को टोल प्लाजा पर सीसीटीवी और निगरानी कक्ष बनाने का सुझाव दिया है। यह निर्देश राजस्थान और तेलंगाना में हुई भीषण सड़क दुर्घटनाओं के बाद दिए गए हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने राजमार्ग सुरक्षा को अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा माना है।
- NHAI को टोल प्लाजा पर सीसीटीवी निगरानी और कंट्रोल रूम स्थापित करने की सलाह दी गई है।
- राजस्थान और तेलंगाना की हालिया दुर्घटनाओं में 34 लोगों की जान गई थी।
- अवैध पार्किंग और ब्लैकस्पॉट को रोकने के लिए तकनीक के उपयोग पर जोर दिया गया है।
नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को राजमार्गों पर अवैध अतिक्रमण और खड़े वाहनों से होने वाले खतरों पर गहरी चिंता व्यक्त की। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को टोल प्लाजा पर कैमरा निगरानी प्रणाली और निगरानी कक्ष स्थापित करने पर विचार करने का निर्देश दिया है।
यह मामला एक सुओ मोटो (स्वत: संज्ञान) कार्यवाही के तहत सुनवाई के दौरान आया, जो नवंबर 2025 में राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी जिलों में हुई दो भीषण सड़क दुर्घटनाओं के बाद शुरू हुई थी। इन दुर्घटनाओं में कुल 34 लोगों की जान चली गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि राजमार्ग उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत जीवन के अधिकार का एक अभिन्न अंग है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में राजमार्ग दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण अनियंत्रित पार्किंग और ब्लैकस्पॉट हैं। तकनीकी निगरानी न केवल दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान करने में मदद करेगी, बल्कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों को तत्काल प्रतिक्रिया देने में भी सक्षम बनाएगी।
राजमार्गों पर अवैध रूप से खड़े वाहन सड़क सुरक्षा के लिए एक निरंतर खतरा बने हुए हैं और दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण हैं।
सुनवाई के दौरान, NHAI के वकील ने बताया कि अनधिकृत पार्किंग को रोकने के लिए नियमित निरीक्षण और राजमार्ग गश्त के लिए सर्कुलर जारी किए गए हैं। हालांकि, पीठ ने कहा कि केवल गश्त पर्याप्त नहीं है और तकनीक का उपयोग अधिक प्रभावी होगा। अदालत ने अमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एन.एस. नाडकर्णी की दलीलों को भी सुना, जिन्होंने अवैध पार्किंग को एक गंभीर समस्या बताया।
ऐतिहासिक संदर्भ
अप्रैल में, शीर्ष अदालत ने जिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिया था कि वे राजमार्ग सुरक्षा क्षेत्रों के भीतर सभी अनधिकृत संरचनाओं को 60 दिनों के भीतर हटा दें या ध्वस्त कर दें। अदालत ने स्थानीय निकायों को बिना NHAI या PWD की मंजूरी के इन क्षेत्रों में लाइसेंस या एनओसी जारी करने से भी रोक दिया था।
नवंबर 2025 की दुर्घटनाओं का विवरण भयावह था। फलोदी में एक टेम्पो ट्रैवलर, जिसमें तीर्थयात्री सवार थे, सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से टकरा गया, जिससे 15 लोगों की मृत्यु हो गई। इसके ठीक एक दिन बाद, तेलंगाना में एक बस और ट्रक की टक्कर में 19 लोगों की जान चली गई।
Frequently Asked Questions
1. सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को क्या सुझाव दिया है?
अदालत ने राजमार्गों पर अवैध पार्किंग और अतिक्रमण की निगरानी के लिए टोल प्लाजा पर सीसीटीवी कैमरे और निगरानी कक्ष स्थापित करने का सुझाव दिया है।
2. यह मामला क्यों शुरू हुआ?
यह मामला राजस्थान और तेलंगाना में हुई दो बड़ी सड़क दुर्घटनाओं के बाद शुरू हुआ, जिनमें 34 लोगों की मृत्यु हो गई थी।