कोलकाता उच्च न्यायालय ने त्रिनामूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को हेट स्पीच मामले में 31 अगस्त तक गिरफ्तारी से बचाने का अंतरिम आदेश दिया। यह निर्णय 27 अगस्त को सुनवाई के बाद लागू होगा।
- कोलकाता हाई कोर्ट ने मोइत्रा को 31 अगस्त तक गिरफ्तारी से बचाया
- केस की सुनवाई 27 अगस्त को तय
- शिकायत में होम मंत्री, सेना और हिंदू धार्मिक प्रतीकों पर टिप्पणी शामिल
त्रिनामूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को कल कोलकाता उच्च न्यायालय ने एक अंतरिम आदेश में 31 अगस्त तक गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की। यह आदेश एक डिवीजन बेंच द्वारा जारी किया गया, जिसमें न्यायाधीश देबांग्शु बसाक और न्यायाधीश आर्यक दत्ता शामिल थे।
मोहितर की वकालत करने वाले वकील ने तर्क दिया कि नादिया के क्रिश्ननगर कोर्ट ने बिना उसके व्यक्तिगत उपस्थिति से मुक्त होने के आवेदन पर विचार किए, सीधे वारंट जारी किया। मोइत्रा ने सेक्शन 228, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत व्यक्तिगत हाजिरी से छूट की मांग की थी।
केस की उत्पत्ति चाइना नंदी और पाँच अन्य शिकायतकर्ताओं की ओर से हुई, जिन्होंने मोइत्रा पर केंद्रीय गृह मंत्री, भारतीय सेना और हिंदू धार्मिक प्रतीकों, विशेषकर तुलसी माला, के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उनके धार्मिक भावनाओं को आहत किया गया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this protection order underscores the delicate balance between parliamentary privilege and hate‑speech laws in India, and may set a precedent for how courts handle similar political cases.
"ऐसे मामलों में विधायी अधिकार और आपराधिक प्रक्रिया के बीच का संतुलन लोकतंत्र की जड़ें तय करता है," कहा कानूनी विशेषज्ञ प्रो. अजय सिंह ने।
क्रिश्ननगर कोर्ट ने 19 अगस्त को वारंट जारी किया, जब मोइत्रा ने कई बार कोर्ट की हाजिरी के निर्देशों को न मानने का आरोप लगाया। वह उस समय दिल्ली में संसद की कार्यवाही में व्यस्त थीं, और कोर्ट ने अगले दिन व्यक्तिगत हाजिरी का आदेश दिया, जिससे उन्हें 24 घंटे से कम समय में यात्रा करनी पड़ी।
अंततः, कोलकाता हाई कोर्ट ने इस अंतरिम आदेश के साथ मोइत्रा को अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई से बचाया, जबकि मामला 27 अगस्त को पुनः सुनवाई के लिए निर्धारित है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या यह सुरक्षा आदेश स्थायी रहेगा?
उत्तर: नहीं, यह केवल 31 अगस्त तक के लिए है; आगे की सुनवाई में निर्णय बदला जा सकता है।
प्रश्न 2: इस केस में कौन‑से कानून लागू होते हैं?
उत्तर: मुख्यतः भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की सेक्शन 228 और संबंधित आपराधिक प्रक्रिया संहिता के प्रावधान।