बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव के क्षेत्र के कारण ओडिशा के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। पुरी में रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र अगले 12 घंटों में और तीव्र हो सकता है।
- ओडिशा के पुरी, कटक, और मयूरभंज सहित कई जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है।
- पुरी में रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को बिजली और गरज के बीच सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
- पिछले 24 घंटों में कटक के बांकी में 210 मिमी तक भारी वर्षा दर्ज की गई।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र और अधिक तीव्र होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह प्रणाली अगले 12 घंटों के भीतर एक सुस्पष्ट कम दबाव वाले क्षेत्र में बदल सकती है और उत्तर ओडिशा तथा गंगा के मैदानी इलाकों (पश्चिम बंगाल) की ओर उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ सकती है।
क्षेत्रीय प्रभाव और भारी वर्षा का पूर्वानुमान
इस मौसम प्रणाली के प्रभाव से ओडिशा के एक बड़े हिस्से में मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। IMD के बुलेटिन के अनुसार, मयूरभंज, क्योंझर, अंगुल, देवगढ़, संबलपुर, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बालासोर, भद्रक, केंद्रपाड़ा, पुरी, जगतसिंहपुर, खुर्दा, नयागढ़, कटक, ढेंकनाल, जाजपुर, बरगढ़, सोनपुर और बौद्ध जैसे जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। आंकड़ों की बात करें तो पिछले 24 घंटों में कटक जिले के बांकी में सर्वाधिक 210 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि नौ अन्य स्थानों पर भी अत्यधिक भारी बारिश (115-210 मिमी) देखी गई।
पुरी रथ यात्रा और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा निर्देश
ओडिशा के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पुरी में वर्तमान में वार्षिक रथ यात्रा का आयोजन हो रहा है, जहाँ लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र के दर्शन के लिए उमड़े हैं। IMD भुवनेश्वर केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती ने बताया कि पुरी में बारिश की गतिविधियाँ अगले कुछ घंटों तक जारी रह सकती हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि 'पहांडी' अनुष्ठान और अन्य धार्मिक गतिविधियों के दौरान बिजली गिरने या गरज के साथ तूफान आने की स्थिति में वे पेड़ों, बिजली के खंभों या अस्थायी ढांचों के नीचे शरण न लें, बल्कि किसी पक्के निर्माण के नीचे सुरक्षित रहें।
जलवायु परिवर्तन और मानसून की स्थिति
बंगाल की खाड़ी में बार-बार बनने वाले ये कम दबाव के क्षेत्र मानसून की सक्रियता को दर्शाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तीव्र मौसम प्रणालियाँ न केवल कृषि के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि तटीय क्षेत्रों में बाढ़ और जलभराव जैसी चुनौतियों को भी जन्म देती हैं। प्रशासन को सलाह दी गई है कि वे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।