तेलंगाना में मानसून की कमी और एल नीनो के प्रभाव से जल स्तर में भारी गिरावट आई है। सरकार ने किसानों के लिए 'वनकलम 2026' आकस्मिक योजना जारी की है ताकि कृषि संकट को कम किया जा सके।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • तेलंगाना के 18 जिलों में भूजल स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
  • अधिकांश सिंचाई जलाशय अपने न्यूनतम ड्रॉ डाउन स्तर (MDDL) के करीब पहुंच गए हैं।
  • सरकार ने 'एल नीनो आकस्मिक योजना वनकलम 2026' जारी की है।
  • किसानों को कम पानी वाली फसलों और मोटे अनाज (Millets) की ओर बढ़ने की सलाह दी गई है।

तेलंगाना में कृषि क्षेत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की गई है। राज्य के 18 जिलों में भूजल स्तर में भारी गिरावट देखी गई है, जो मानसून की कमी और एल नीनो (El Niño) के बढ़ते प्रभाव का परिणाम है। जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, केवल पांच जिलों में ही सामान्य वर्षा दर्ज की गई, जबकि 27 जिलों में वर्षा की भारी कमी रही। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, राज्य के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने 'एल नीनो आकस्मिक योजना वनकलम 2026' (El Niño Contingency Plan Vanakalam 2026) को मंजूरी दी है।

जलाशयों की चिंताजनक स्थिति

राज्य के प्रमुख, मध्यम और लघु सिंचाई जलाशयों की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। अधिकांश जलाशय अपने न्यूनतम ड्रॉ डाउन स्तर (MDDL) के बहुत करीब या उसके स्तर पर पहुंच गए हैं। गोदावरी बेसिन में केवल 27.69 TMC और कृष्णा बेसिन में मात्र 14.81 TMC उपयोगी भंडारण बचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान जल स्तर केवल पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, जिससे सिंचाई के लिए पानी छोड़ना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।

किसानों के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश

सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे इस संकट की घड़ी में अपनी रणनीति बदलें। कृषि विभाग और ICAR-CRIDA द्वारा संयुक्त रूप से विकसित इस योजना में निम्नलिखित सुझाव दिए गए हैं:
1. कम पानी वाली फसलें: धान जैसी अधिक पानी खपत वाली फसलों के बजाय कम पानी वाली फसलों का चुनाव करें।
2. फसल विविधीकरण: दलहन (Pulses), तिलहन (Oilseeds) और मोटे अनाज (Millets) की खेती को प्राथमिकता दें।
3. अल्पकालिक किस्में: ऐसी फसलों का चयन करें जो कम समय में तैयार हो जाती हैं और सूखे को सहन कर सकती हैं।
4. वर्षा जल संचयन: किसानों को वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।

जलवायु परिवर्तन और भविष्य की चुनौतियां

तेलंगाना की कृषि मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर है, जो राज्य की कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 80% हिस्सा प्रदान करता है। एल नीनो के कारण मानसून की देरी, अनियमित वर्षा और लंबे सूखे की स्थिति पैदा हो रही है। यदि अगस्त 2026 तक वर्षा का स्तर 30% के आसपास ही रहता है, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है। सरकार अब जिला-विशिष्ट आकस्मिक फसल योजना और सटीक मौसम पूर्वानुमान के आधार पर प्रबंधन करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।