तमिलनाडु वन विभाग कोयंबटूर के चदिवयाल हाथी कैंप में पर्यटकों को हाथियों को खाना खिलाते देखने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- तमिलनाडु वन विभाग चदिवयाल हाथी कैंप को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा है।
- पर्यटक हाथियों के भोजन के समय को करीब से देख सकेंगे, जिससे संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
- इस पहल से प्राप्त राजस्व का उपयोग हाथी कैंप के रखरखाव और देखभाल के लिए किया जाएगा।
- वर्तमान में कैंप में मुथु, कावेरी, जॉन और सुमांगला नामक चार हाथी रह रहे हैं।
तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले में स्थित चदिवयाल हाथी कैंप को लेकर एक महत्वपूर्ण विकास हुआ है। तमिलनाडु वन विभाग अब इस कैंप में पर्यटकों को प्रवेश देने की संभावनाओं को तलाश रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पर्यटकों को हाथियों की दैनिक दिनचर्या, विशेष रूप से उनके भोजन के समय को करीब से देखने का अवसर प्रदान करना है।
संरक्षण और जागरूकता का संगम
यह प्रस्तावित योजना मुदुमलाई टाइगर रिजर्व के थेप्पक्कडू हाथी कैंप और अनामलाई टाइगर रिजर्व के कोझिकामुथी हाथी कैंप की तर्ज पर तैयार की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि जब लोग इन विशालकाय जीवों को करीब से देखेंगे, तो उनमें वन्यजीव संरक्षण और हाथियों के महत्व के प्रति एक स्वाभाविक समझ और संवेदनशीलता विकसित होगी। चदिवयाल कैंप वर्तमान में बोलुवम्पट्टी वन रेंज के अंतर्गत आता है और यहाँ चार हाथी—मुथु, कावेरी, जॉन और सुमांगला—निगरानी में हैं।
पर्यटन क्षमता और राजस्व मॉडल
चदिवयाल की भौगोलिक स्थिति इसे पर्यटन के लिए एक आदर्श स्थान बनाती है। यह कोवई कोर्टालम जलप्रपात के अत्यंत निकट है, जहाँ सप्ताहांत में हजारों की संख्या में पर्यटक पहुँचते हैं। वन विभाग की योजना है कि जलप्रपात देखने आने वाले पर्यटकों से एक मामूली प्रवेश शुल्क लिया जाए। इस माध्यम से प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग सीधे हाथी कैंप के बुनियादी ढांचे के सुधार और हाथियों के पोषण के लिए किया जाएगा।
चुनौतियां और आगामी कदम
अनामलाई टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर और मुख्य वन संरक्षक, डी. वेंकटेश ने स्पष्ट किया है कि यह योजना अभी अपने प्रारंभिक चरण में है। विभाग के पशु चिकित्सकों (Veterinarians) से इस संबंध पर महत्वपूर्ण राय मांगी गई है। एक बड़ी चुनौती समय का तालमेल बिठाना है; जहाँ जलप्रपात के लिए पर्यटकों को शाम 4:30 बजे तक ही अनुमति है, वहीं हाथियों के भोजन का समय सुबह 8:30 और शाम 5:30 बजे है। विभाग एक ऐसा समय निर्धारित करने का प्रयास कर रहा है जिससे हाथियों की दिनचर्या में कोई व्यवधान न आए और पर्यटकों को भी सुरक्षित अनुभव मिल सके।