नागार्जुन सागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR) के गुंडला ब्रह्मेश्वरम रेंज में एक 12 वर्षीय बाघिन का शव मिला है। प्रारंभिक जांच में शिकार की संभावना को खारिज किया गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • नागार्जुन सागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR) में 12 वर्षीय बाघिन का शव बरामद।
  • प्रारंभिक जांच के अनुसार, शरीर के अंगों (दांत और पंजे) के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है।
  • अधिकारियों का संदेह है कि मृत्यु का कारण वृद्धावस्था हो सकती है।
  • जैविक नमूनों को विस्तृत जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है।

आंध्र प्रदेश के नागार्जुन सागर श्रीशैलम टाइगर रिजर्व (NSTR) से एक दुखद खबर सामने आई है। गुंडला ब्रह्मेश्वरम (GBM) रेंज में एक 12 वर्षीय बाघिन का मृत शरीर पाया गया है। वन विभाग के कर्मचारियों ने 12 जुलाई को इस शव को खोज निकाला, जिसके बाद तत्काल प्रोटोकॉल के तहत जांच शुरू कर दी गई।

विस्तृत पोस्टमार्टम और जांच प्रक्रिया

नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) के मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन करते हुए, 13 जुलाई को एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा पोस्टमार्टम किया गया। इस समिति में प्रोजेक्ट टाइगर के उप निदेशक सी. चैतन्य कुमार रेड्डी, गुंडला ब्रह्मेश्वरम के वन रेंज अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी और NTCA के प्रतिनिधि शामिल थे।

जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि बाघिन के शरीर के सभी महत्वपूर्ण हिस्से, जैसे कि उसके कैनाइन (दांत) और पंजे, पूरी तरह सुरक्षित पाए गए हैं। वन अधिकारी श्री उदयदीप के अनुसार, शव से अंगों को निकालने या अवैध शिकार (Poaching) के कोई भी स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। यह जानकारी वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अक्सर शिकारियों द्वारा बाघों के अंगों को निशाना बनाया जाता है।

वृद्धावस्था या अन्य कारण?

प्रारंभिक निष्कर्षों के आधार पर, अधिकारियों का मानना है कि बाघिन की मृत्यु वृद्धावस्था (Old Age) के कारण हुई हो सकती है। हालांकि, पूर्ण स्पष्टता के लिए जैविक नमूनों को विस्तृत प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेज दिया गया है। सभी वैधानिक औपचारिकताओं और नमूना संग्रह के बाद, शव का निपटान निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार कर दिया गया है।

श्रीशैलम टाइगर रिजर्व भारत के सबसे महत्वपूर्ण बाघ आवासों में से एक है। इस क्षेत्र में बाघों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य की निगरानी निरंतर जारी है। इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीव विशेषज्ञों के बीच पारिस्थितिक तंत्र की स्थिरता और बाघों के जीवन चक्र पर चर्चा छेड़ दी है।