बेंगलुरु के मूर्ति निर्माता और विक्रेता पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की मूर्तियों और लोकप्रिय प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) के बीच एक कठिन संघर्ष का सामना कर रहे हैं।

  • ग्राहकों की पसंद अभी भी चमकदार PoP मूर्तियों की ओर अधिक है।
  • मिट्टी की उपलब्धता में कमी और बढ़ती लागत एक बड़ी समस्या है।
  • सरकार ने PoP मूर्तियों की बिक्री रोकने के लिए विशेष ऑपरेशन टीम का गठन किया है।

बेंगलुरु के पारंपरिक मूर्ति निर्माण केंद्रों, जैसे पोटरी टाउन, मावली और शेषद्रिपुरम में इस समय एक गहरा द्वंद्व देखने को मिल रहा है। एक तरफ राज्य सरकार, गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और पर्यावरण कार्यकर्ता गणेश चतुर्थी के लिए 'इको-फ्रेंडली' या पर्यावरण के अनुकूल मिट्टी की मूर्तियों को बढ़ावा दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

स्थानीय मूर्तिकारों का कहना है कि घर के उत्सवों के लिए लोग रंगीन मूर्तियों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि बड़े पंडालों में भव्यता दिखाने के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) का सहारा लिया जाता है। कुंबारा समुदाय के चौथे पीढ़ी के सदस्य शशिकुमार बताते हैं कि PoP की मूर्तियां बनाना आसान है क्योंकि वे जल्दी सूखती हैं और उन पर रंगों का छिड़काव तुरंत किया जा सकता है। इसके विपरीत, मिट्टी की मूर्तियों को तैयार होने में महीनों का समय और अत्यधिक श्रम लगता है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक धार्मिक मुद्दा नहीं है, बल्कि एक गंभीर आर्थिक और पारिस्थितिक संकट है। मिट्टी की मूर्तियों की मांग कम होने के कारण कारीगरों को भारी आर्थिक नुकसान का डर रहता है। साथ ही, बेंगलुरु के झीलों के सिकुड़ने के कारण प्राकृतिक मिट्टी की उपलब्धता भी कम हो गई है, जिससे लागत में भारी वृद्धि हुई है।

'मिट्टी की मूर्तियों के लिए जागरूकता अभियान त्योहार के ठीक पहले नहीं, बल्कि कई महीने पहले शुरू होना चाहिए ताकि निर्माता समय रहते तैयारी कर सकें।'

एक अन्य समस्या मूर्तियों के आकार को लेकर है। कारीगरों के अनुसार, 6 से 12 फीट जितनी विशाल मूर्तियां मिट्टी से बनाना लगभग असंभव है क्योंकि वे बहुत भारी हो जाती हैं और उनका ढांचा संभालना मुश्किल होता है। यही कारण है कि बड़े सार्वजनिक पंडालों में PoP और कागज का उपयोग किया जाता है।

तुलनात्मक विश्लेषण: मिट्टी बनाम PoP

विशेषतामिट्टी की मूर्ति (Clay)प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP)
निर्माण समय3 महीने तक का समयमात्र 6 घंटे में सूख जाती है
पर्यावरण प्रभावपूरी तरह सुरक्षित और घुलनशीलजल प्रदूषण का मुख्य कारण
उपलब्धता/लागतमिट्टी महंगी और दुर्लभ हैसस्ती और आसानी से उपलब्ध
डिजाइन और आकारसीमित और भारीविशाल और जटिल डिजाइन संभव

पर्यावरण के प्रति जागरूक कारीगर नंदीश का कहना है कि बाजार में मिलने वाले 'वॉटर पेंट' भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं क्योंकि उनमें सूक्ष्म रसायनों के अवशेष रह जाते हैं। हालांकि, सरकार ने इस दिशा में सख्त कदम उठाए हैं। कर्नाटक के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री रामलिंग रेड्डी ने घोषणा की है कि PoP मूर्तियों के निर्माण और बिक्री को रोकने के लिए एक विशेष ऑपरेशन टीम (Special Operation Team) का गठन किया गया है।

Did You Know?: बेंगलुरु में मिट्टी की एक छोटी खेप की कीमत अब लगभग ₹12,000 तक पहुंच गई है क्योंकि स्थानीय स्रोतों की कमी हो गई है।

Frequently Asked Questions

1. PoP मूर्तियां पर्यावरण को कैसे नुकसान पहुंचाती हैं?
PoP पानी में नहीं घुलता और जल निकायों में भारी धातु और रसायनों को छोड़ता है, जिससे जलीय जीवन को खतरा होता है।

2. सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने विभिन्न जिलों में छापेमारी कर 1,283 गैर-अनुपालन वाली PoP मूर्तियों को जब्त किया है और एक विशेष टीम तैनात की है।