तमिलनाडु के उधगमंडलम में नीलगिरी मार्टन और नीलगिरी पिपिट के संरक्षण के लिए एक समर्पित केंद्र की शुरुआत की गई है। ₹25 लाख की लागत से बना यह केंद्र इन दुर्लभ प्रजातियों के प्रजनन और अनुसंधान पर केंद्रित होगा।
- उधगमंडलम के सरकारी कला महाविद्यालय परिसर में नए संरक्षण केंद्र का उद्घाटन।
- ₹25 लाख की लागत से तमिलनाडु वन विभाग द्वारा स्थापित।
- नीलगिरी मार्टन और नीलगिरी पिपिट जैसी दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण पर ध्यान।
- अनुसंधान, शिक्षा और जैव विविधता जागरूकता को बढ़ावा देना।
तमिलनाडु के उधगमंडलम (ऊटी) में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, शनिवार को नीलगिरी मार्टन और नीलगिरी पिपिट के लिए एक समर्पित संरक्षण और विकास केंद्र का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र उधगमंडलम स्थित सरकारी कला महाविद्यालय परिसर में स्थित है, जो इस क्षेत्र की जैव विविधता को बचाने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
इस केंद्र का उद्घाटन तमिलनाडु के वन मंत्री आर.वी. रंजीत कुमार द्वारा किया गया। इस अवसर पर नीलगिरी की जिला कलेक्टर लक्ष्मी भव्या तनीरू, मुदुमलई टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर आर. किरुबा शंकर और नीलगिरी के प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) कश्यप शशांक रवि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। ₹25 लाख की लागत से निर्मित यह केंद्र राज्य सरकार की वन्यजीव संरक्षण नीति का एक हिस्सा है।
संरक्षण के मुख्य उद्देश्य
यह केंद्र विशेष रूप से नीलगिरी मार्टन और नीलगिरी पिपिट के संरक्षण और प्रजनन (breeding) पर ध्यान केंद्रित करेगा। ये दोनों प्रजातियां नीलगिरी के पारिस्थितिकी तंत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ मानी जाती हैं। केंद्र का उद्देश्य न केवल इन प्रजातियों की संख्या बढ़ाना है, बल्कि उनके प्राकृतिक आवास (habitat) के संरक्षण को भी सुनिश्चित करना है।
इसके अतिरिक्त, यह केंद्र छात्रों और आम जनता के बीच इन दुर्लभ प्रजातियों के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए एक शैक्षिक केंद्र के रूप में भी कार्य करेगा। शोधकर्ताओं के लिए यह केंद्र डेटा संग्रह और वन्यजीव व्यवहार के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन बनेगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि नीलगिरी जैसे संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में इस तरह के समर्पित केंद्रों की स्थापना लुप्तप्राय प्रजातियों के अस्तित्व के लिए अनिवार्य है। प्रजातियों का स्थानीय स्तर पर संरक्षण करने से न केवल उनकी आबादी बढ़ती है, बल्कि यह पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है।
दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण केवल एक जीव को बचाना नहीं है, बल्कि पूरे पारिस्थितिक तंत्र की अखंडता को सुरक्षित करना है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
नीलगिरी क्षेत्र अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन शहरीकरण और आवास के नुकसान के कारण यहाँ की कई स्थानिक (endemic) प्रजातियां खतरे में हैं। नीलगिरी मार्टन जैसे शिकारी जीव खाद्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और उनकी कमी पूरे जंगल के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।
Frequently Asked Questions
1. यह नया संरक्षण केंद्र कहाँ स्थित है?
यह केंद्र उधगमंडलम के सरकारी कला महाविद्यालय परिसर में स्थित है।
2. इस केंद्र के निर्माण पर कितनी लागत आई है?
इस केंद्र को स्थापित करने के लिए तमिलनाडु वन विभाग द्वारा ₹25 लाख खर्च किए गए हैं।