जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के नार्को-टेरर सिंडिकेट के खिलाफ विशेष NIA अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं। यह मामला ड्रग्स तस्करी के जरिए आतंकी गतिविधियों को फंडिंग करने के बड़े नेटवर्क से जुड़ा है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- विशेष NIA अदालत ने जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित LeT नार्को-टेरर सिंडिकेट के खिलाफ आरोप तय किए।
- SIA कश्मीर की जांच में पाया गया कि ड्रग्स तस्करी की कमाई का उपयोग आतंकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए किया जा रहा था।
- मामले में 16 आरोपी शामिल हैं, जिनमें से कुछ पाकिस्तान और PoJK में छिपे हुए हैं।
- आरोपियों पर UAPA, NDPS अधिनियम और IPC की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक बड़ी कानूनी सफलता मिली है। एक विशेष NIA अदालत ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े एक बड़े नार्को-टेरर सिंडिकेट के खिलाफ आरोप तय (frame charges) कर दिए हैं। यह मामला 2022 में दर्ज किया गया था, जिसने सीमा पार से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे मिलने वाली अवैध कमाई के जरिए आतंकवाद को मिलने वाली फंडिंग के खतरनाक गठजोड़ को उजागर किया था।
नार्को-टेरर का खतरनाक जाल
SIA (स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) कश्मीर की गहन जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि कैसे यह सिंडिकेट नियंत्रण रेखा (LoC) के पार से नशीले पदार्थों की तस्करी करता था। इस तस्करी से प्राप्त होने वाले अवैध धन का उपयोग केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को वित्तपोषित करने, आतंकी बुनियादी ढांचे को बनाए रखने और पूरे टेरर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए किया जा रहा था। यह नेटवर्क पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में बैठे हैंडलर्स द्वारा संचालित किया जा रहा था।
आरोपियों की सूची और कानूनी कार्रवाई
जांच में कुल 16 व्यक्तियों की पहचान की गई है। इनमें से 10 आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं और अब उन पर मुकदमा चलेगा। गिरफ्तार आरोपियों में रुबीना नजीर मलिक, इस्फक अहमद मीर और मुदासिर अहमद पोसवाल जैसे नाम शामिल हैं। वहीं, कुछ आरोपी जैसे तारिक अहमद मलिक और मुश्ताक अहमद नाइक वर्तमान में पाकिस्तान या PoJK में छिपे हुए हैं और उन्हें 'घोषित अपराधी' घोषित किया जा चुका है। एक आरोपी, मुश्ताक अहमद मलिक (alias राही), मुठभेड़ में मारा जा चुका है।
कठोर कानूनी प्रावधान
अदालत ने आरोपियों के खिलाफ NDPS अधिनियम (1985), UAPA (1967) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। इनमें भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना, आपराधिक साजिश रचना, आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देना और आतंकी संगठनों के लिए धन जुटाना जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। SIA अब इन आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया में भी जुटी है ताकि आतंकवाद की वित्तीय कमर तोड़ी जा सके।