विजयवाड़ा सांसद केसिनेनी शिवनाथ ने आंध्र प्रदेश यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (APUWJ) के 70वें स्थापना दिवस पर पत्रकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और वित्तीय सहायता की मांगों को सरकार तक पहुँचाने का वादा किया है।
- सांसद केसिनेनी शिवनाथ ने पत्रकारों की समस्याओं को केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया।
- APUWJ ने पत्रकारों के परिवारों के लिए 25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता और स्वास्थ्य बीमा की मांग की।
- कार्यक्रम में मूल्य-आधारित पत्रकारिता के पतन और गलत सूचनाओं (Misinformation) के प्रसार पर चिंता जताई गई।
विजयवाड़ा में आंध्र प्रदेश यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (APUWJ) के 70वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विजयवाड़ा सांसद केसिनेनी शिवनाथ ने मीडिया जगत की चुनौतियों पर गहरा चिंतन किया और पत्रकारों को पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पत्रकारों की लंबित मांगों और सुरक्षा चिंताओं को केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के सामने मजबूती से रखेंगे।
सांसद शिवनाथ ने वर्तमान समय में पत्रकारिता के गिरते स्तर पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक दौर था जब पत्रकारिता का अर्थ सरकार की जवाबदेही तय करना और उसकी बारीकी से जांच करना होता था। उस समय राजनेता अपनी खबरों को लेकर सशंकित रहते थे, लेकिन आज के डिजिटल युग में पत्रकारिता के मूल्यों में बदलाव आया है, जो चिंताजनक है।
क्यों है यह महत्वपूर्ण?
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि डिजिटल युग में जहाँ सूचनाओं की गति बढ़ी है, वहीं पत्रकारों की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता कम हुई है। जब सत्ताधारी प्रतिनिधि पत्रकारों के अधिकारों की बात करते हैं, तो यह प्रेस की स्वतंत्रता के लिए एक सकारात्मक संकेत होता है। विशेष रूप से आंध्र प्रदेश जैसे राज्य में, जहाँ क्षेत्रीय रिपोर्टिंग चुनौतीपूर्ण हो सकती है, सरकारी समर्थन अनिवार्य है।
"पत्रकारिता केवल सूचना का प्रसार नहीं, बल्कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है; यदि इसकी नींव (सुरक्षा और नैतिकता) कमजोर होगी, तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा।"
APUWJ के महासचिव के. जयराज ने पत्रकारों की कई गंभीर मांगों को रेखांकित किया। इनमें हमलों में मारे गए पत्रकारों के परिवारों को 25 लाख रुपये की सहायता, व्यापक स्वास्थ्य सेवा, रेलवे रियायतों की बहाली, आवास साइटों का आवंटन, सेवानिवृत्ति की आयु 58 से बढ़ाकर 65 वर्ष करना और प्रत्येक पत्रकार के लिए 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा शामिल है।
कार्यक्रम के दौरान 'पत्रकारिता - तब और अब' शीर्षक से एक सेमिनार का भी आयोजन किया गया। इसमें प्रिंट मीडिया से इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया तक के सफर पर चर्चा हुई। विजयवाड़ा सेंट्रल विधायक बोंडा उमामहेश्वर राव ने इस बात पर जोर दिया कि मीडिया को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि गलत सूचनाओं का प्रसार समाज के लिए घातक हो सकता है।
| मांग/मुद्दा | प्रस्तावित समाधान/मांग |
|---|---|
| वित्तीय सहायता | मृतक पत्रकारों के परिवार को ₹25 लाख |
| बीमा | प्रत्येक पत्रकार के लिए ₹10 लाख दुर्घटना बीमा |
| सेवानिवृत्ति आयु | 58 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. APUWJ ने मुख्य रूप से किन मांगों पर जोर दिया?
मुख्य मांगों में वित्तीय सहायता, स्वास्थ्य बीमा, रेलवे रियायतें और सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाना शामिल है।
2. सेमिनार 'पत्रकारिता - तब और अब' का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य मीडिया के बदलते स्वरूप (प्रिंट से डिजिटल) और पत्रकारिता के गिरते मूल्यों व विश्वसनीयता पर चर्चा करना था।