इरोड के कदम्बुर पहाड़ियों में रहने वाले आदिवासी समुदायों ने जिला प्रशासन से बस सेवा शुरू करने की मांग की है। निवासियों का कहना है कि मुख्य सड़क तक पहुँचने के लिए उन्हें हाथियों के इलाके से गुजरना पड़ता है, जो बेहद जोखिम भरा है।

  • कदम्बुर पहाड़ियों के नागलुर गांव के 145 परिवारों ने बस सेवा के लिए याचिका दायर की।
  • निवासियों को मुख्य सड़क तक पहुँचने के लिए 1.2 किमी का खतरनाक जंगली रास्ता पार करना पड़ता है।
  • हाथियों की आवाजाही के कारण स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा खतरे में है।

तमिलनाडु के इरोड जिले में स्थित कदम्बुर पहाड़ियों के एक आदिवासी बस्ती के निवासियों ने सोमवार को जिला कलेक्टर कार्यालय में एक याचिका सौंपी। इस याचिका के माध्यम से उन्होंने अपने गांव तक नियमित बस सेवा शुरू करने की पुरजोर मांग की है। ग्रामीणों का तर्क है कि परिवहन के साधनों के अभाव में बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच पाना लगभग असंभव हो गया है।

नागलुर गांव, जो करलयम के पास स्थित है, में पिछले 83 वर्षों से लगभग 145 परिवार निवास कर रहे हैं। इस क्षेत्र में एक सरकारी आदिवासी कल्याण आवासीय माध्यमिक विद्यालय भी है, जहाँ वर्तमान में 51 छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। परिवहन की अनुपलब्धता के कारण इन छात्रों का भविष्य और दैनिक आवागमन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।

परिवहन का संकट और वन्यजीवों का खतरा

ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें मुख्य सड़क तक पहुँचने के लिए घने जंगल के बीच से लगभग 1.2 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। यह रास्ता विशेष रूप से खतरनाक है क्योंकि यहाँ जंगली हाथियों का अक्सर आना-जाना रहता है। हाथियों के हमलों का डर हर समय बना रहता है, जिससे विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह यात्रा जानलेवा साबित हो सकती है।

बुनियादी बुनियादी ढांचे का अभाव आदिवासी समुदायों को मुख्यधारा से अलग करता है और उनकी सुरक्षा को जोखिम में डालता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this is not just a request for transport, but a demand for basic human rights and safety. The lack of connectivity in tribal belts often leads to higher dropout rates in schools and delayed medical intervention for pregnant women. The intersection of wildlife corridors and human settlements requires a strategic transport solution that ensures both human safety and ecological balance.

बस सेवा के अलावा, निवासियों ने आंगनवाड़ी केंद्र के लिए एक अलग भवन की मांग भी की है। वर्तमान में, आंगनवाड़ी केंद्र स्कूल परिसर के भीतर ही संचालित हो रहा है, जिससे छोटे बच्चों की देखभाल और शिक्षा में बाधा आ रही है।

क्या आप जानते हैं?: कदम्बुर पहाड़ियाँ अपनी समृद्ध जैव विविधता और आदिवासी संस्कृति के लिए जानी जाती हैं, लेकिन यहाँ का कठिन भूगोल अक्सर विकास कार्यों में बाधा बनता है।

Frequently Asked Questions

1. निवासियों ने बस सेवा की मांग क्यों की है?
क्योंकि उन्हें मुख्य सड़क तक पहुँचने के लिए हाथियों के खतरे वाले जंगल से 1.2 किमी पैदल चलना पड़ता है।

2. याचिका में परिवहन के अलावा और क्या मांग की गई है?
ग्रामीणों ने आंगनवाड़ी केंद्र के लिए एक अलग भवन की मांग की है।