भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार ने लखनऊ में छात्रों को बताया कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (ईवीएम) न तो इंटरनेट, न ब्लूटूथ और न ही वाई‑फ़ाई से जुड़ी होती हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है।
- ईवीएम पूरी तरह ऑफ़लाइन कार्य करती हैं
- कोई रिमोट हैकिंग या डेटा लीक नहीं
- चुनाव प्रक्रिया में सभी पार्टियों की समान निगरानी
ईवीएम की तकनीकी विशेषताएँ
मुख्य चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार ने लखनऊ के कोल्विन तालुकदार कॉलेज में छात्रों को समझाया कि भारतीय ईवीएम में कोई भी इंटरनेट कनेक्शन, ब्लूटूथ या वाई‑फ़ाई मॉड्यूल नहीं होता। यह डिज़ाइन चुनाव की सुरक्षा को मजबूत बनाता है और बाहरी हस्तक्षेप को रोकता है।
पारदर्शिता और पार्टियों की भूमिका
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रक्रिया को पारदर्शी रखने के लिए सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव के दौरान स्वतंत्र निरीक्षण का अधिकार है। इससे मतदान के हर चरण में भरोसा बना रहता है।
शिक्षा संस्थानों में जागरूकता अभियान
सीईसी ने उत्तर प्रदेश के कई शैक्षणिक संस्थानों में दो-दिन का दौरा किया, जहाँ ग्यानेश कुमार ने छात्रों को ईवीएम की कार्यप्रणाली, सुरक्षा उपाय और मतदाता अधिकारों के बारे में बताया। इस पहल का उद्देश्य युवा वर्ग में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान बढ़ाना है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that misinformation about EVM connectivity can fuel mistrust. By clarifying that EVMs are offline devices, the Election Commission reinforces public confidence ahead of upcoming state elections.
"ऑनलाइन कनेक्टिविटी के बिना ईवीएम की सुरक्षा सबसे बड़ी गारंटी है," कहा साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या ईवीएम को किसी भी तरह से रिमोटली हैक किया जा सकता है?
उत्तर: नहीं, क्योंकि इनमें कोई नेटवर्क मॉड्यूल नहीं है, इसलिए रिमोट एक्सेस संभव नहीं है।
प्रश्न 2: चुनाव के दौरान पार्टियों को ईवीएम की जाँच का अधिकार है?
उत्तर: हाँ, सभी पंजीकृत राजनीतिक दलों को गिनती, काउंटर और मशीन की जाँच करने की अनुमति है।